बचपन के दिनों से इस शख्स को जानने वालों ने बताया था कि उन दिनों वो पढ़ाई-लिखाई में काफी तेज-तर्रार था। इसके अलावा उसे रेसलिंग का शौक था। रेसलिंग में वो राष्ट्रीय चैंपियन भी था। उसका शौक था कि वो एक पुलिसवाला बने। हम बात कर रहे हैं तरनतारन के रहने वाले जगबीर उर्फ जग्गा की। पुलिवाला बनने का सपना संजोने वाला जगबीर गैंगस्टर बनेगा यह किसी ने नहीं सोचा था। जग्गा के बड़े भाई गुरसिमरनजीत सिंह ने मीडियो को बताया था कि उन्होंने अपने छोटे भाई के साथ ही बारहवीं कक्षा की पढा़ई की थी। गुरसिमरनजीत सिंह सीआरपीएफ जवान हैं। जगबीर ने पंजाब पुलिस की ट्रेनिंग भी हासिल की थी।
साल 2019 में शिरोमणि अकाली दल के नेता प्रह्लाद खांटवा पर कातिलाना हमला हुआ था। इस हमले में जग्गा का हाथ था। उस हमले में अकाली दल के नेता बाल-बाल बच गये थे। हमले के बाद अकाली नेता के अंगरक्षकों ने हमलावरों पर भी फायरिंग की थी और फिर हमलावर वहां से भागने लगे थे। इसी दौरान थोड़ी दूर जाने के बाद आरोपियों की स्कॉर्पियो पलट गई थी और फिर जग्गा को ग्रामीणों ने घेर लिया था। खुद को घिरता देख उस वक्त जग्गा ने अपनी ही बंदूक से खुद को गोली मार ली थी। उस वक्त पुलिस ने बताया था कि जेल में बंद मशहूर गैंगस्टर लारेंस बिश्नोई के इशारे पर ही अकाली दल के नेता पर हमला किया गया था।
जग्गा पर अबोहर, मलोट, फाजिल्का, तरनतारन समेत अनेक जगहों पर उसके खिलाफ मामले दर्ज थे। यह भी बताया जाता है कि कई मामलों में तो वह भगोड़ा भी था। उस पर 21 किलो हेरोइन का मामला तरनतारन में दर्ज किया गया था, बाद में वह जेल से फरार हो गया था। गुरसिमरन के अनुसार जगबीर कुछ वर्ष पहले गलत संगत का शिकार हो गया और करीब 5 वर्ष पूर्व जगबीर मलोट में 21 किलो हेरोइन सहित पकड़ा गया था।
इसके बाद वो जुर्म की दलदल में फंसता गया था। गुरसिमरन ने मीडिया को बताया था कि जगवीर रोपड़ जेल में बंद था और जनवरी में उनसे आखिरी मुलाकात हुई थी। उस समय उसने वादा किया था अब वह कोई गलत कार्य नहीं करेगा। इसके बाद पता नहीं कब वह लारेंस बिश्रोई गैंग में संपर्क में आ गया। जगबीर के पिता की काफी समय पहले ही मौत हो चुकी थी।

