दुनिया भर में कई ऐसे जासूस हुए जो अपने काम की वजह से काफी चर्चित हुए। आज हम बात कर रहे हैं दुनिया की सबसे मशहूर जासूस मार्गेथा गीरत्रुइदा मैकलियोड की। मार्गेथा गीरत्रुइदा मैकलियोड को माता हारी के नाम से भी जाना जाता है। बताया जाता है कि कामुक नृत्यांगना से जासूस बनने वाली माता हारी की वजह से 50 हजार फ्रांसिसि सैनिकों की जान गई। यह भी बताया जाता है कि साल 1905 में माता हारी सबसे पहले पेरिस आई थी। यहां उन्होंने नृत्य की शुरुआत की। जल्दी ही वो पूरे यूरोप में कामुक नृत्यांगना के तौर पर मशहूर हो गईं।
हालांकि माता हारी का जन्म कहां हुआ इसकी कोई पुख्ता जानकारी उपलब्ध नहीं है। लेकिन कहा जाता है कि माता हारी का जन्म नॉर्थ हॉलैंड के एक छोटे से गांव में सन् 1876 में हुआ था। बताया जाता है कि जब वो अपने पहले पति के साथ मलेशिया में कई सालों तक रही थीं तब उन्होंने भारतीय औऱ Javanese डांस सीखी। माता हारी के पति Dutch colonial army में स्कॉट थे। नृत्य के दौरान अर्धनग्न हो कर दर्शकों को मनमोहित करने की उनका कला की वजह से उनका काफी नाम था। रूस से लेकर फ्रांस तक के डांस हॉल और ओपेरा हाउस में उनका जलवा था।
जासूस थीं माता हारी?
यहीं वजह थी कि प्रथम विश्व युद्ध के दौरान कई देशों के बड़े मिलिट्री अधिकारी भी माता हारी के प्रशंसक बन गए थे। ऐसे कई सारे सबूत मौजूद होने का दावा किया जाता है जिसके आधार पर कहा जाता है कि माता हारी एक जर्मन जासूस थीं। हालांकि जर्मनी के अधिकारियों का कहना था कि वो एक कमजोर जासूस थी जिनके पास थोड़ी-बहुत ही सूचना होती थी और यह सूचनाएं ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं होती थीं। कुछ अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अपने पेशे के कारण उनके लिए सफर करना आसान था।
50 हजार सैनिकों की मौत की जिम्मेदार
इस कारण जर्मनी ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान माता हारी को पैसे के बदले जानकारियां साझा करने का प्रस्ताव दिया और इस तरह वह जर्मनी की जासूस बनीं। माता हारी ने खुद तो किसी को नहीं मारा, लेकिन उनकी जासूसी ने लगभग 50 हजार फ्रांसिसी सैनिकों को मौत के घाट उतारा।
फरवरी 1917 में फ्रेंच अधिकारियों ने माता हारी को पकड़ लिया। माता हारी को पेरिस के St. Lazare Prison में कैद किया गया था। मिलिट्री ट्रायल के दौरान माता हारी पर नए हथियारों और टैकों की सूचना लीक करने तथा 50,000 फ्रांसीसी सैनिकों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। माता हारी को मौत की सजा सुनाई गई। कहा जाता है कि 15 अक्टूबर को जब उन्होंने फांसी से पहले पहनाए जाने वाला काला कपड़े पहनने से इनकार कर दिया तब उन्हें बाद में गोली मार दी गई।

