अक्सर जब कोई छात्र अपने छात्र जीवन में तेज-तर्रार होता है और अचानक करियर की राह में उसे असफलता मिलती है तब वो घबरा जाता है। लेकिन असफलताओं से जो लड़ कर उसपर विजय हासिल करते हैं वो जिंदगी में बड़ा मुकाम पाते हैं। आज हम एक ऐसे ही सफल शख्सियत के बारे में आपको बताने जा रहे हैं जो असफलताओं से कभी निराश नहीं हुए।

पश्चिम बंगाल के कोलकाता में जन्में रौनक अग्रवाल शुरू से ही पढ़ाई-लिखाई में काफी तेज-तर्रार थे। उनके दादा चाहते थे कि रौनक एक आईएएस अफसर बनें। कोलकाता से ही रौनक अग्रवाल की शुरुआती पढ़ाई हुई। इंटरमीडिएट करने के बाद उन्होंने बीकॉम में दाखिला लिया। बचपन के दिनों से ही होनहार रौनक ने गेजुएशन में गोल्ड मेडल हासिल किया और वो गोल्ड मेडलिस्ट बन गए। रौनक यही नहीं रुके उन्होंने चाटर्ड अकाउंटेंट की पढ़ाई पूरी की।

लगातार सफलताओं के झंडे गाड़ रहे रौनक अग्रवाल ने इसके बाद यूपीएससी की परीक्षा देने का फैसला किया। यूपीएससी की परीक्षा पास करने से पहले रौनक का सामान हुआ असफलताओं से। सीए करने के बाद जब रौनक अग्रवाल ने यूपीएससी में पहला प्रयास किया तब वो प्री-परीक्षा में ही फेल हो गए। उन्होंने दोबारा प्रयास किया लेकिन इस बार भी असफलता ही उनके हाथ लगी। कॉलेज के दिनों का एक गोल्ड मेडलिस्ट छात्र जब 2 बार यूपीएससी की परीक्षा में असफल हुआ तो भी उसने हिम्मत नहीं हारी।

रौनक अग्रवाल ने धैर्य के साथ फिर से यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। तीसरी बार में रौनक ने अपनी पिछली गलतियों को सुधारा और टॉपर्स की सूची में शुमार हो गए। उन्होंने साल 2019 में यूपीएससी में ऑल इंडिया रैंक 13 प्राप्त की।