मुख्यमंत्री का फर्जी हस्ताक्षर कर पैसे निकालने वाले गिरोह का भंडाफोड़ होने से खलबली मच गई है। इस मामले में पुलिस ने उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और बस्ती जिले से 5 लोगों को पकड़ा है। इन सभी पर आरोप है कि यह लोग असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनेवाल के नाम से जाली हस्ताक्षर करते थे और राहत बचाव कार्य के पैसे निकाल लेते थे। इस गैंग का पर्दाफाश करने के बाद पुलिस ने जानकारी दी है कि यह लोग फर्जीवाड़ा कर सीएम रिलीफ फंड से पैसे निकाला करते थे।
दरअसल कुछ दिनों पहले गुवाहाटी में मुख्यमंत्री कार्यालय ने राहत फंड में हुए ट्रांजेक्शन को लेकर गड़बड़ी पाई थी। जिसके बाद स्पेशल विजिलेंस सेल को इस मामले की जांच करने और इसे 15 दिनों के अंदर सुलझाने का निर्देश दिया गया था। इस सेल के पुलिस अधीक्षक Rosie Kalita ने 12 अगस्त को एफआईआऱ दर्ज कराई थी। एफआईआर में इस बात का जिक्र किया गया था कि फर्जी सिग्नेचर के जरिए हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पैसे निकाले गये हैं।
मामले की जांच के दौरान जांच सेल के 7 पुलिसकर्मियों ने गोरखपुर और बस्ती के कुछ इलाकों में छापेमारी की और 5 लोगों को पकड़ा। इस बात की जानकारी पुलिस अधीक्षक ने मीडिया को दी है। पुलिस का यह भी दावा है कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने खुद कबूल किया है कि इससे पहले भी इनलोगों ने कई राज्यों में चेक पर फर्जीगिरी के जरिए पैसे निकाले हैं।
पुलिस ने बताया कि इस मामले की छानबीन के दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस ने उनका पूरा सहयोगा किया। फर्जी तरीके से निकाली गई रकम को बरामद कर लिया गया है। आपको याद दिला दें कि इसी साल जनवरी के महीने में जम्मू-कश्मीर से भी एक ऐसा ही मामला सामने आया था। यहां पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के जाली हस्ताक्षर से सुविधा लेने वाले एक व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। आरोप लगा था कि 2 साल पहले इस व्यक्ति ने वैष्णो देवी जाने के दौरान हेलीकॉप्टर का टिकट लेने के लिए महबूबा मुफ्ती का फर्जी हस्ताक्षर किया था।
