अपनी जिंदगी में कड़ी मेहनत औऱ लगन से आईएएस अफसर बनने की कई कहनियां हमने अब तक आपको बताई हैं। आज हम जिस आईएएस अफसर का जिक्र यहां कर रहे हैं उनके बारे में आपको बता दें कि एक बड़े प्रशासनिक ओहदे पर होने के बावजूद वो खेती भी करते हैं।
साल 2009 बैच के आईएएस अधिकारी रामवीर सिंह अक्सर खेतों में काम करते हुए देखे जा सकते हैं। एक साक्षात्कार में रामवीर सिंह ने कहा था कि ”इंसान बेशक कामयाबी की सीढ़ियां चढ़कर किसी भी मुकाम पर पहुंच जाए, लेकिन अपनी विरासत बचाने और अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए उसे हमेशा अपनी जमीन और परंपरा से जुड़े रहना चाहिए। खेती को अलविदा कहकर बेशक आज युवा पीढ़ी विदेश का रुख कर रही है, लेकिन अपनी मिट्टी व खेती को बचाकर रखना हर किसान परिवार के बेटे का फर्ज है।”
हरियाणा के झज्जर जिले में एक किसान परिवार में पैदा हुए रामवीर सिंह के पिता भी सरकारी नौकरी में थे। रिटायर होने के बाद रामवीर सिंह खेतीबाड़ी से जुड़ गए थे। बचपन में रामवीर सिंह भी अपने परिवार के सदस्यों के साथ खेतीबाड़ी और पशुओं के साथ कामकाज करते थे।
दिल्ली स्थित जेएनयू से राजनीति शास्त्र में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने एमए की पढ़ाई की थी। उन्होंने सिक्योरिटी रिलेशंस में एमफिल भी की है। पढ़ाई-लिखाई में मेधावी रामवीर सिंह आईएएस अधिकारी बनने से पहले आईआरएस अधिकारी के तौर पर चयनित हुए थे।
रामवीर सिंह एक कुशल प्रशासनिक अधिकारी होने के अलावा एक बेहतरीन किसान भी हैं। सरकारी रिहायश की जमीन पर जैविक खेती कर रामवीर सिंह युवाओं के लिए मिसाल बन गए।
खेतों में लहलहाती गेहूं की फसल को काटते रामवीर सिंह की तस्वीर भी सामने आई थी। चेहरी पर सूती पकड़ा बांध मजदूरों के साथ गेहूं की कटाई करने में जुटे आईएएस अफसर रामवीर सिंह अपने काम से समय निकाल कर खेतों में समय व्यतीत करना कभी नहीं भूलते हैं। रामवीर सिंह खेती के अलावा गायों का दूध निकालने का भी काम कुशलता पूर्वक करते हैं।
