सिक्किम में अपराजिता राय कोई नया नाम नहीं हैं। अपराजिता राय को सिक्किम की पहली महिला आईपीएस अफसर होने का गौरव हासिल है। अपराजिता राय ने साल 2010 और साल 2011 में यूपीएससी की परीक्षा दी थी और दोनों ही बार इन्होंने परीक्षा पास किया था। हालांकि एक गरीब लड़की से आईपीएस बनने तक का उनका सफर इतना आसान नहीं था।

अपराजिता राय का जन्म एक शिक्षित परिवार में हुआ था। उनके पिता डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर थे। अपराजिता की मां ग्रेजुएट स्कूल टीचर थे। अपराजिता जब 8 साल की थीं तब उनके पिता गुजर गये थे। पिता के गुजरने के बाद अपराजिता के घर की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो गई थी। इस दौरान अपराजिता को कई बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़े। दफ्तर के अंदर सरकारी बाबुओं के व्यवहार से वो काफी आहत भी हुईं।

इसी वजह से उन्होंने सरकारी सिस्टम का हिस्सा बनने का फैसला किया। उन्होंने अपनी पढ़ाई-लिखाई का तरीका बदला और ठान लिया कि वो सरकारी मशीनरी का अंग बनेंगी। आईपीएस अफसर बनने के बाद एक साक्षात्कार के दौरान अपराजिता ने कहा था कि ‘जो कोई भी मेरे पास आता है उसे दूसरे सरकारी दफ्तरों की तरह प्रताड़ना ना सहना पड़े, मैं यहीं चाहती हूं।’

स्कूल के दिनों में अपराजिता राय एक मेधावी छात्रा थीं। ISC की परीक्षा में अपराजिता राय स्टेट टॉपर बनीं थीं और उन्होंने 95 फीसदी मार्क्स हासिल किया था। Tashi Namgyal Academy में अपराजिता राय ने Best Girl All Rounder Shrimati Ratna Pradhan Memorial Trophy जीता था। बाद में उन्होंने अपना बीए एलएलबी पूरा किया और न्यायशास्त्र और लोक प्रशासन दोनों में नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ़ ज्यूरिडिकल साइंसेज, कोलकाता से स्वर्ण पदक जीतकर खुद को फिर से साबित किया।

आगे भी अपराजिता ने बहुत से अवार्ड्स अपने नाम किये। उनकी प्रमुख उपलब्धियों में सर्वश्रेष्ठ लेडी आउटडोर प्रोबेशनर के लिए 1958 बैच आईपीएस अधिकारियों की ट्रॉफी, फील्ड कॉम्बैट के लिए श्री उमेश चंद्र ट्रॉफी, बेस्ट टर्न आउट के लिए वरिष्ठ कोर्स ऑफिसर्स ट्रॉफी का 55 वां बैच और बंगाली के लिए पश्चिम बंगाल सरकार की ट्रॉफी शामिल है।

अपराजिता ने साल 2010 में पहली बार यूपीएससी परीक्षा दी थी और पहली बार में ही उनका चयन भी हो गया था। हालांकि उस समय उनकी रैंक उनके मन की नहीं थी। अपराजिता को उस समय 768वीं रैंक हासिल हुयी थी। उन्होंने अगले ही साल 2011 में फिर कोशिश की और इस साल उन्होंने 358वीं रैंक पायी साथ ही आईपीएस की सेवा भी। 28 साल की अपराजिता को 2012 में आईपीएस कैडर मिला था।