आज बात एक ऐसे पुलिसवाले की जिनकी बहादुरी के किस्से दूर-दूर तक मशहूर हैं। विपिन चंद्र पंत की गिनती उत्तराखंड के बहादुर पुलिसवालों में होती है। साल 1990 से पुलिस में सेवाएं दे रहे विपिन चंद्र पंत गाजियाबाद, नोएडा, पिथौरागढ़, देहरादून, लोहाघाट, चमोली में सेवाएं दे चुके हैं। ऐसे जांबाज पुलिस अफसर को जनता के दिलों में जगह बनाने के लिए जाना जाता है।
विपिन चंद्र पंत ने साल 2012 में एक लड़की के गायब होने और फिर बाद में उसकी लाश खेत से मिलने के मामले की जांच की थी। उच्चाधिकारियों से मिले निर्देश के बाद इंस्पेक्टर पंत ने मामले की जांच की और आरोपी दीपक आर्या को गिरफ्तार कर लिया था। आरोपी को कोर्ट ने दुष्कर्म और हत्या के मामले में फांसी की सजा सुनाई थी। इस मामले में 57 संदिग्धों की डीएनए जांच के बाद आरोपी दीपक पकड़ में आया था। 28 फरवरी 2014 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश मीना तिवारी ने दीपक को दुष्कर्म, हत्या व अन्य धाराओं में दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी।
इंस्पेक्टर पंत ने साल 2014 में काठगोदाम में 6 साल की बच्ची के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में आरोपियों को पकड़ने के साथ ही उन्हें फांसी के फंदे तक पहुंचाया था। साल 2004 में बनबसा के गड्ढा चौकी में छेड़खानी करने पर नेपाल के माओवादियों ने हरियाणा के दो पर्यटकों का अपहरण कर लिया था। विपिन चंद्र पंत वेश बदलकर माओवादियों के बीच पहुंचे और पर्यटकों को छुड़ाया था। उनकी इस बहादुरी की काफी प्रशंसा हुई थी।
इंस्पेक्टर विपिन चंद्र पंत को जब भी जिम्मेदारी सौंपी गई है उन्होंने विभाग का मान बढ़ाया। वह हत्या करने के जघन्य अपराध के अभियुक्तों को उनके अंजाम तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। बहादुरी के चलते वह दो बार राज्यपाल पुरस्कार पा चुके हैं। बड़े-बड़े सीनियर भी इंस्पेक्टर विपिन चंद्र पंत की बहादुरी का लोहा मानते हैं।

