जो इंसान असफलताओं से नहीं घबराता और मुश्किल परिस्थितियों में डटकर खड़ा रहता है उसे सफलता जरुर मिलती है। इस बात को चरितार्थ कर दिखाया जगदीश बांगड़वा ने। वैसे छात्र जिन्हें जिंदगी में कभी असफलता का स्वाद भी चखना पड़ता है उन्हें जगदीश बांगड़वा की कहानी जरुर जाननी चाहिए। राजस्थान के बाड़मेर जिले के एक छोटे से गांव बायतु कस्बे के रहने वाले जगदीश बांगड़वा छात्र जीवन में होनहार थे। जगदीश बांगड़वा को उस वक्त झटका लगा था जब वो दसवीं क्लास में फेल हो गये थे। इतना ही नहीं 12वीं में गणित में उन्हें महज 38 अंक मिले थे।
बेशक होनहार जगदीश बांगड़वा को मार्क्स कम मिले थे और उनका रिजल्ट प्रभावशाली नहीं था। लेकिन जगदीश का हौसला कहीं से भी कम नहीं हुआ था। जगदीश ने कड़ी लगन और मेहनत के साथ अपनी पढ़ाई-लिखाई जारी रखी। जिंदगी में कुछ बड़ा करने की चाहते लिए जगदीश बांगड़वा ने भारतीय सिविल सेवा की परीक्षा साल 2018 में दी और उन्हें 486वां रैंक हासिल हुआ था।
जगदीश बांगड़वा ने एक साक्षात्कार में बताया था कि जब वे दसवीं क्लास में थे तब मेडिकल कारणों की वजह से वे परीक्षा नहीं दे पाए थे और फेल हो गए थे। उसके बाद उन्होंने दसवीं की फिर से पढ़ाई की थी। दसवीं की पढ़ाई पूरी होने के बाद नौकरी लेने वाले की इच्छा लेकर उन्होंने मैथ्स ले लिया। लेकिन दो साल के अंदर उन्हें लगने लगा कि मैथ्स में वे कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं। वहां भी उन्हें असफलता ही हाथ लगी। जगदीश का जब 12वीं का परिणाम आया तो गणित विषय में महज 38 नंबर पासिंग मार्क्स आए।
जगदीश ने बताया था कि उनके सामने इस दौरान कई चैलेंज आए क्योंकि, वे एक बहुत ही छोटे से गांव से आते हैं। उन्हें सिविल सर्विसेज के बारे में कभी इतनी जानकारी नहीं थी। उन्होंने सोच रखा था कि पढ़-लिखकर आईटीआई में जाकर नौकरी कर लेंगे। लेकिन पहले उन्होंने आरएएस एग्जाम पास किया। उसके बाद सिविल सर्विसेज की तैयारी करनी शुरू कर दी. इसके बाद 2018 में उन्हें 486वीं रैंक हासिल हुई।
एक आईपीएस अफसर बनने के बाद जगदीश बांगड़वा ने कहा था कि अगर उन्हें मौका मिलता है, तो वो मारवाड़(Marwar) में महिलाओं की शिक्षा के लिए काम करना चाहते हैं। ताकि महिलाओं का जीवन बदल सकें और उनके उत्थान के लिए काम कर सकें। जगदीश बांगड़वा की कहानी उन सभी छात्रों और बच्चों के लिए मिसाल है जो जीवन में फेल होने या कम मार्क्स की वजह से हिम्मत हार जाते हैं। एक छोटे से गांव से निकलकर तमाम बाधाओं को पार कर मंजिल तक पहुंचने का जगदीश बांगड़वा का सफर बेहद शानदार है।

