राजस्थान में 18 साल की एक लड़की को उसके पिता ने सिर्फ इसलिए मौत के घाट उतार दिया क्योंकि वो एक दलित युवक से प्यार करती थी। गंभीर बात यह भी है कि राजस्थान हाईकोर्ट ने खुद इस लड़की को सुरक्षा भी प्रदान रखी थी। लड़की के पिता शंकर लाल सैनी ने बीते बुधवार को पुलिस को बताया कि उन्होंने अपनी बेटी पिंकी की हत्या कर दी है। यह हत्या दौसा स्थिति लड़की के घर परकी गई है। पुलिस ने लड़की का शव बरामद कर लिया है। लड़की की गला दबाकर हत्या करने के निशान भी मिले हैं।

पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार ने ‘The Indian Express’ को बताया कि पिंकी सैनी ने 16 फरवरी को एक युवक के साथ शादी रचाई थी औऱ 21 फरवरी को वो 24 साल के रोशन महावार के साथ घर से कहीं चली गई। 26 फरवीर को कपल राजस्थान हाईकोर्ट में पेश हुए। यहां अदालत ने स्थानीय पुलिस को आदेश दिया था कि वो कपल जहां कही भी जाना चाहते हैं पुलिस उन्हें सुरक्षा प्रदान करे।

पुलिस पिंकी और रोशन को लेकर जयपुर चली गई। यह दोनों जयपुर जाना चाहते थे। 1 मार्च को दोनों रोशन के घर दौसा आ गए। इसके बाद लड़की के परिजन उसी दिन जबरन लड़की को अपने साथ लेकर चले गए। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि बुधवार की रात लड़की के पिता थाने पहुंचे थे और उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी बेटी की हत्या कर दी है। जब हम उनके घर गए तब हमें लड़की का शव मिला। प्रथम दृष्टया यह मामला गला दबाकर हत्या का लगता है।’

इस मामले में शंकर लाल सैनी के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया है। पुलिस की तरफ से यह आशंका जताई गई है कि इस हत्याकांड में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। इस मामले में पिंकी और रोशन के वकीलों ने पुलिस पर लापरवाही का इल्जाम लगाया है और कहा है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुलिस, कपल को सुरक्षा प्रदान करने के लिए बाध्य थी।

26 फरवरी को अपने एक आदेश में राजस्थान हाई कोर्ट के जस्टिस सतीश कुमार शर्मा ने कपल को सुरक्षा प्रदान किये जाने का आदेश दिया था। बताया जाता है कि 1 मार्च को पिंकी के अपहरण के बाद रोशन के परिवार के सदस्यों ने पिंकी के पिता, चाचा और अन्य 11 रिश्तेदारों के खिलाफ केस दर्ज कराया थआ। इसके अलावा 15-20 अन्य लोगों पर भी केस दर्ज हुआ था।

एफआईआर में रोशन के परिवार वालों ने आरोप लगाया था कि शंकर लाल सैनी और अन्य आरोपियों ने उन्हें जातिसूचक गालियां दी, घऱ में तोड़फोड़ की, 1.2 लाख रुपए चुराए और पिंकी को जबरन अपने साथ ले गए। इस मामले में अपहरण, आपराधिक साजिश, चोरी और एससी/एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था।

रोशन ने ‘The Indian Express’ से बातचीत करते हुए कहा कि ‘मैंने पुलिस को बताया था कि उसके परिवार वाले पिंकी को ले गए। लेकिन पुलिस ने उनसे कहा कि यह पिंकी के परिजन थे जो उन्हें ले गए,,वो अदालत में अगली सुनवाई के वक्त पिंकी को लेकर आएंगे। मैंने रो-रो कर पुलिस से गुहार लगाई। लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया।

इधर अब इस मामले में कई सामाजिक कार्यकर्ताओं औऱ सिविल सोसायटी ने भी कार्रवाई की मांग उठाई है। People’s Union for Civil Liberties की राजस्थान यूनिट की अध्यक्ष कविता श्रीवास्तव ने कहा कि हम इस मामले में दोषी पुलिसकर्मियों और सर्किल ऑफिसर को सस्पेंड किये जाने की मांग करते हैं। रोशन ने 100 नंबर पर पुलिस को फोन भी किया लेकिन फिर भी पिंकी का अपहरण हो गया। हालांकि इधऱ इस मामले में सर्किल ऑफिसर दीपक कुमार का कहना है कि दौसा पुलिस को हाईकोर्ट के आदेश की जानकारी नहीं थी।