इंसान की खाल उधेड़ कर कोई एल्बम या अपना पर्स बनवाए तो यकीनन इसे क्रूरता की हद ही कहा जाएगा। पोलैंड में स्थित प्राचीन वस्तुएं के एक बाजार में इंसानी जिस्म से बनाए गए सामान मिलने से हर कोई अचरज में है। बताया जा रहा है कि दूसरे विश्व युद्ध के दौरान हिटलर ने बंदियों के लिए जो कैंप बनवाए थे उन्हीं बंदियों की हत्या या मौत के बाद उनकी खाल उधेड़ कर फोटो रखने के लिए एल्बम और अन्य सामान बनवाए गए थे।

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फिलहाल इस एल्बम को ‘Auschwitz Memorial Museum’ को सौंप दिया गया है। बताया जा रहा है कि इस एल्बम को खरीदने वाले को एल्बम के कवर पर टैटू और इंसानी बाल भी नजर आए। एल्बम से बदबू आने के बाद इस बात का खुलासा हुआ कि यह सामान इंसानी जिस्म से बनाए गए थे।

म्यूजियम प्रबंधन का मानना है कि एल्बम का कवर जर्मनी के Buchenwald Concentration Camp से आया है। आपको बता दें कि Buchenwald शासक हिटलर का पहला कैंप था। यह कैंप करीब 8 साल तक रहा था। इसमें करीब 2 लाख 50 हजार महिलाएं, पुरुष और बच्चे रखे गए थे।

ऐसा माना जाता है कि इस कैंप की स्थापना साल 1937 में की गई थी और इस कैंप में 55,000 से ज्यादा लोग मारे गए। कहा जाता है कि इसमें सिर्फ राजनीतिज्ञ या हिटलर से रंजिश रखने वाले लोगों को ही नहीं बल्कि दिमागी तौर से बीमार, दिव्यांग, गे और अन्य लोगों को भी बंदी के तौर पर रखा गया था।

यह कैंप इंसानों पर प्रयोग किये जाने और उनपर जुल्म-ओ-सितम किये जाने के लिए कुख्यात था। इस कैंप के कमांडर Karl-Otto Koch काफी क्रूर माना जाता था। इतना ही नहीं उसकी पत्नी Ilse Koch भी बंदियों पर जुल्म करने के लिए जानी जाती थी।

Ilse Koch बंदियों के शरीर पर टैटू बनवा कर उनकी हत्या करवा देती थी। इसके बाद बंदियों की खाल उधेड़ कर इससे किताबों के कवर, टेबुल के कवर और साजो-सज्जा के दूसरे अन्य सामान भी बनाए जाते थे।

इस कैंप से बचकर आए कई पीड़ितों ने पहले बताया भी था कि यहां पर्स, किताब-कवर और अन्य सामान बनाने के लिए इंसानी चमड़े का इस्तेमाल किया जाता था। जो एल्बम इस म्यूजियम में रखा गया है उसमें करीब 100 पुरानी तस्वीरें लगी हुई हैं। म्यूजियम प्रबंधन का मानना है कि यह एल्बम Bavarian फैमिली का था। यह परिवार दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान एक गेस्ट हाउस चलाता था।