इस शख्स ने बेरहमी से 19 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। दिव्यांगों के लिए बनाए गए एक केंद्र में कत्लेआम मचाने वाले इस शख्स को अदालत ने क्रूर हत्यारा करार दिया है और मौत की सजा सुनाई है। इस हत्यारे का नाम Satoshi Uematsu है। 30 साल के Satoshi Uematsu ने Yokohama में अदालत से कहा कि ‘वो मानसिक और शारीरिक रुप से दिव्यांग लोगों से जापान को मुक्त कराना चाहता था।’ न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक उसने अधिकारियों से कहा था कि वो ‘हिटलर’ से प्रभावित है।
जापान के इतिहास में इस ‘नरसंहार’ को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हुए भयानक हत्याकांडों में से एक माना जाता है। साल 2016 में हुई घटना के बाद यहां लोग दहल उठे थे। बताया जाता है कि Satoshi Uematsu ने टोक्यो के एक दिव्यांग केंद्र में कई सालों तक काम किया जहां उसने इन हत्याओं को अंजाम दिया था। लेकिन पकड़े जाने से पहले उसने यह केंद्र छोड़ भी दिया था।
उसने एक राजनेता को एक चिट्ठी देने की कोशिश भी की थी और इस चिट्ठी में उसने धमकी दी थी कि वो जापान के बेहतरी के लिए 100 दिव्यांगों को मार देगा। इसके बाद उसे अस्पताल में भी भर्ती कराया गया था।
बताया जाता है कि उसने 19 लोगों को चाकू से गोद कर मार डाला। हत्याकांडों को अंजाम देने के बाद उसने खून से सने चाकू के साथ पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। 16 मार्च, 2020 को इस मामले में सुनवाई करते हुए अदालत में जज ने कहा कि Satoshi Uematsu ने भयानक कृत्य किया है और इसकी किसी अन्य अपराध से तुलना संभव नहीं।
अदालत ने उसे दोषी मानते हुए मौत की सजा सुनाई। अदालत का फैसला आने के बाद दोषी के वकीलों की तरफ से फैसले के खिलाफ कोई अपील भी दायर नहीं की गई है।
यह मामला जापान के उन चुनिंदा आपराधिक मुकदमों में से एक था जिसकी सुनवाई ज्यूरी के सामने हुई। बचाव पक्ष की टीम ने ज्यूरी के सामने कहा कि घटना के वक्त Satoshi Uematsu की मानसिक स्थित ठीक नहीं थी और वो नहीं समझ सका कि उसने किस तरह का अपराध किया है। लेकिन जज और ज्यूरी ने इन हत्याओं के लिए उसे दोषी माना और मौत की सजा का ऐलान किया।

