झारखंड राज्य का एक जिला है जमशेदपुर। इसी जिले से ताल्लुक रखता था अखिलेश सिंह। नाम साधारण सा लगता हो पर उसके काम बेहद ही संगीन थे। अखिलेश सिंह किसी समय झारखंड के डॉन नंबर वन के नाम से मशहूर था। कहा जाता है कि पुलिस हो, व्यापारी हो या फिर कोई दूसरा गैंगस्टर। हर कोई अखिलेश सिंह के नाम से कांपता था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 50 से अधिक मामलों में वांटेड था और जब वो पकड़ा गया था तब अदालतों में उसके खिलाफ 36 मामले लंबित थे।
इस कुख्यात का राज्य में इतना आतंक था कि कोई भी उसके खिलाफ बोलने से कतराता था। कहा जाता है कि अपने खिलाफ उठने वाली आवाज को वो हमेशा-हमेशा के लिए शांत कर देता था। साल 2017 के अक्टूबर महीने में इस खूंखार अपराधी के खिलाफ जमशेदपुर पुलिस और गुरुग्राम क्राइम ब्रांच की एक टीम ने संयुक्त ऑपरेशन किया था। दरअसल सूचना मिली थी कि अखिलेश सिंह गुरुग्राम के एक फ्लैट में अपनी पत्नी के साथ छिपा है।
पुलिस ने मामले में गुप्त तरीके से जांच-पड़ताल की तब पता चला कि यह दुर्दांत गैंगस्टर सुशांत लोक के फ्लैट 520 बी में छिपा हुआ है। इसके बाद दोनों राज्यों की पुलिस टीम ने इस फ्लैट को चारों तरफ से घेर लिया। पुलिस को देखते ही अखिलेश सिंह ने उनपर गोली चला दी। पहले से ही तैयार इस संयुक्त टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला और अखिलेश सिंह को करारा जवाब दिया।
पुलिस की फायरिंग में अखिलेश घायल हो गया। बाद में उसे गुरुग्राम स्थित सिविल अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। कहा जाता है कि एक वक्त ऐसा था जब अखिलेश का हुक्म मानने से इनकार करने वालों का खेल चुटकियों में खत्म कर दिया जाता था। एक अन्य अपराधी विक्रम शर्मा की शार्गिदी में अपराध जगत की एबीसीडी सीखनेवाला अखिलेश सिंह एक बार जरायम की दुनिया में जो कूदा तो फिर उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक के बाद एक वारदात को अंजाम देकर उसने न केवल पुलिस की नींद उड़ा दी बल्कि करोड़ों की प्रॉपर्टी भी खड़ी कर ली थी। अखिलेश सिंह पर 55 से अधिक गंभीर वारदातों को अंजाम देने का आरोप था।
