आज बात एक ऐसे जेल ब्रेक कांड की जिसने देश को कभी हिला कर रख दिया था। इस कांड में जेल के अंदर कैद 299 कैदी फरार हो गये थे। उस वक्त बताया गया था कि फरार होने वाले कैदियों में से 110 नक्सली थे। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में हुए इस जेल ब्रेक कांड के बाद राज्य के तत्कालीन गृहमंत्री रामविचार नेतम ने माना था कि यह जेल ब्रेक कांड सुरक्षा इंतजामों के फेल होने की वजह से हुआ था।
16 दिसंबर 2007 को हुए इस जेल ब्रेक कांड को लेकर उस वक्त कहा गया था कि इस जेल ब्रेक में नक्सली नेता सुजित मंडावी का हाथ था। उस वक्त कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया था कि नक्सली नेता सुजिस मंडावी ने पूरे प्लान के तहत इस वारदात को अंजाम दिया था। खुद नक्सली नेता और उसके सभी साथियों ने संतरी के कनपटी पर बंदूक रखकर जेल का गेट खुलवाया था और फिर फरार हुए थे। दंतेवाड़ा जेल ब्रेक एक बड़ी वारदात थी, जिसने पुलिस और जेल की व्यवस्था पर सवाल तो उठाया ही था, नक्सलियों की ताकत का भी इस वारदात से पता चला था।
इस जेल ब्रेक कांड के बारे में उस वक्त बताया गया था कि इस घटना को शाम 4.35 मिनट पर उस वक्त अंजाम दिया गया था जब जेल में कैदियों को खाना परोसा जा रहा था। उस वक्त नक्सली कमांडर सुजीत कुमार ने जेल के गार्ड का हथियार छीन लिया और उसे घुटनों पर ला दिया।
इसके बाद सुजीत कुमार ने जेल के दूसरे सुरक्षा प्रहरियों पर फायरिंग कर उन्हें जख्मी कर दिया। यह जेल राज्य की राजधानी से करीब 375 किलोमीटर दूर था। उस वक्त यह इलाका नक्सल प्रभावित भी माना जाता था।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में उस वक्त बताया गया था कि नक्सलियों ने प्रहरियों से 6 रायफल और एक वायरलेस वहां से फरार होने से पहले छीन लिया था। पुलिस ने उस वक्त बताया था कि यह जेल ब्रेक कांड एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था जिसमें ज्यादातर नक्सली समर्थक शामिल थे। बाद में पुलिस ने इस कांड में शामिल कुछ नक्सलियों को पकड़ा भी था।

