जब मेहनत करने के बाद भी सफलता नहीं मिलती है तब अक्सर कई लोगों का हौसला जवाब देने लगता है औऱ वो टूटने लगते हैं। लेकिन आज हम उस शख्सियत की बात कर रहे हैं जिसे एक-दो बार नहीं बल्कि 5 बार असफलता हाथ लगी एक बारगी तो उनका भी हौसला जवाब देने लगा लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और एक बेहतरीन मुकाम हासिल किया।
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के रहने वाले सौरभ ने इंटरमीडिएट करने के बाद ग्रेजुएशन में दाखिला ले लिया। ग्रेजुएशन करने के बाद तेज-तर्रार सौरभ पांडे की नौकरी भी लग गई। जॉब करते हुए सौरभ के मन में यूपीएससी की परीक्षा देने का विचार आया। इसके बाद उन्होंने देश के इस सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। इसी क्रम में साल 2014 में सौरभ कुमार ने यूपीएससी में पहला प्रयास किया लेकिन सफलता उनके हाथ नहीं आई।
इसके बाद लगातार दो प्रयास में वह प्री परीक्षा पास नहीं कर पाए। कुल मिलाकर शुरुआती तीन प्रयासों में उन्हें यूपीएससी की मेंस परीक्षा तक जाने का मौका नहीं मिला। इसके बाद चौथे और पांचवें प्रयास में वह इंटरव्यू तक पहुंचे लेकिन फाइनल लिस्ट में नाम नहीं आया। पांचवीं बार परीक्षा में फेल होने के बाद सौरभ हिम्मत हारने लगे। उनका धैर्य जवाब देने लगा।
नकारात्मकता से घिरे सौरभ को उनके परिजनों और दोस्तों का सहारा मिले। इन लोगों ने सौरभ को सकारात्मकता से जोड़ा। हालांकि उनके दोस्त और परिवार वालों ने काफी सपोर्ट किया और एक और प्रयास करने के लिए प्रेरित किया था। इन सभी के मोटिवेशन से सौरभ ने आखिरी प्रयास करने का फैसला लिया और इस बार उनकी किस्मत ने साथ दिया। इस तरह उन्होंने 2019 में ऑल इंडिया रैंक 66 प्राप्त कर आईएएस अफसर बनने का सपना पूरा कर लिया।

