मेहनत और ईमानदारी से काम करने वाली कई महिला आईएएस अफसरों की कहानी अब तक हमने आपको बताई है। आज हम जिस अफसर की बात यहां कर रहे हैं उनके लगन को देखते हुए उन्हें कोरोना वॉरियर्स कहना गलत नहीं होगा। इस साल की तरह पिछले साल भी कोरोना वायरस ने देश भर में तबाही मचाई थी। आंध्र प्रदेश भी कोरोना का कहर झेल रहा था। पिछले साल ग्रेटर विशाखापटनम म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में कमिश्नर पद पर तैनात सृजना गुम्माला की एक तस्वीर सामने आई थी जिसमें वो अपने दुधमुंहे बच्चे को गोद में लेकर अपने कार्यालय में ड्यूटी निभाती नजर आई थीं।
कोरोना महामारी के वक्त भी काम के प्रति उनके लगन की सभी लोगों ने सराहना की थी। यह भी जानकारी सामने आई थी कि प्रेग्नेंसी के वक्त भी वो लगातार अपनी ड्यूटी कर रही थीं। आखिरी वक्त पर वो सीधे अस्पताल पहुंची थीं औऱ बच्चे को जन्म दिया था। बच्चे को जन्म देने के बाद भी सृजना गुम्माला ने ज्यादा वक्त तक आराम नहीं किया। दरअसल उस वक्त देश भर में केंद्र सरकार ने लॉकडाउन का ऐलान किया था।
इस IAS अफसर ने अपनी जिम्मेदारी समझते हुए बच्चे के जन्म के महज 22 दिन बाद ही अपनी मेटरनिटी लीव छोड़ दी और ड्यूटी पर जा पहुंचीं। चूंकि उस वक्त उन्हें 12-12 घंटे तक लगातार काम करना पड़ रहा था इसलिए इस नई मां ने बच्चे को घर पर छोड़ने की बजाए कई बार साथ लाने जैसा बड़ा कदम उठाया था। अफसर काम की व्यस्तता के बीच पक्का कर रही थीं कि एक महीने से भी छोटे बच्चे की पूरी तरह से देखभाल हो सके।
नवजात बच्चे के साथ अपनी ड्यूटी निभा रही इस आईएएस अफसर की सभी ने प्रशंसा की थी। उस वक्त सृजना गुम्माला ने कहा था कि ‘इस मुश्किल वक्त में कई लोग अपना काम कर रहे हैं, कुछ दान कर रहे हैं, कुछ खाना खिला रहे हैं, कुछ ओवरटाइम कर रहे हैं…इसी तरह से मुझे भी लगा कि मेरा ड्यूटी पर जल्दी लौटना फिलहाल जरूरी है।’
सृजना गुम्माला के बारे में बताया जाता है कि वो मूल रूप से हैदराबाद की रहने वाली हैं। उन्होंने ओस्मानिया यूनिवर्सिटी हैदराबाद से मनोविज्ञान विषय में साल 2002 से 2005 के बीच बीए की डिग्री ली थी। वो पढ़ाई में हमेशा से कुशाग्र थीं। इसके बाद साल 2005 में उन्होंने हैदराबाद यूनिवर्सिटी में एमए राजनीति विज्ञान में दाखिला लिया था।
यहां से 2007 में एमए की डिग्री ली। इसके अलावा उन्हें स्वीडन की Uppsala University से गोल्ड मेडल भी मिल चुका है। साल 2007 में उन्होंने एसवी यूनिवर्सिटी तिरुपति से शोध छात्रा के रूप में दाखिला लिया था। उन्होंने साल 2013 में यूपीएससी में 44वीं रैंक हासिल की थी। उनके पिता जी बालारमैया भी आईएएस अफसर हैं।

