यह सिर्फ कठिन मेहनत से ही संभव है कि आप यूपीएससी जैसी बड़ी परीक्षा को पास कर सकें। आज एक ऐसे होनहार शख्सियत की हम बात कर रहे हैं जिनकी कठिन लगन ने उन्हें सफलता के शिखर तक पहुंचा दिया। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले अरुण राज साल 2014 के आईआईटी कानपुर पास आउट हैं। आईआईटी क्लीयर करने के बावजूद अरुण राज ने कहीं नौकरी नहीं की बल्कि उन्होंने यूपीएससी की तैयारी करने पर फोकस किया।
अरुण राज के बारे में आपको बता दें कि वो बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में होनहार थे। उन्होंने दसवीं में 94.8 और बारहवीं में 91.6 प्रतिशत अंकों के साथ परीक्षा पास की थी। ग्रेजुएशन करते समय ही अरुण तय कर चुके थे कि उन्हें यूपीएससी परीक्षा ही पास करनी है। उन्होंने हमेशा से अपने दिमाग में यह बात रखी और ग्रेजुएशन के आखिरी साल से ही सेल्फ स्टडी के माध्यम से यूपीएससी की तैयारी भी शुरू कर दी थी।
अरुण राज के बारे में बताया जाता है कि उन्होंने यूपीएसी परीक्षा की तैयारी के लिए कोई भी कोचिंग नहीं ली थी और खुद से ही परीक्षा की तैयारी की थी। उन्होंने यूपीएससी की तैयारी के दौरान NCERT टेक्स्बुक पर ज्यादा फोकस किया था। यूपीएससी में उन्होंने Anthropology को वैकल्पिक विषय के तौर पर चुना था।
अरुण राज उन कैंडिडेट्स में से नहीं थे जिनके पास आईआईटी के साथ ही यूपीएससी की तैयारी करने जैसी कोई मजबूरी या कोई दबाव हो। ये उनकी खुद की च्वॉइस थी। अरुण ने खुद अपने लिए इस कठिन जीवन का चुनाव किया और यह उनका खुद पर विश्वास ही था कि वे पहली बार में ही सफल भी हो गए थे। साल 2014 में उन्होंने आईएएस की परीक्षा में 34वां रैंक हासिल किया था।
एक साक्षात्कार में अरुण राज ने कहा था कि ‘पढ़ाई के लिए बनाए गए शेड्यूल को लेकर रिजिड रहो पर चूंकि इंसानों को मूड स्विंग होता ही है तो ऐसे मौकों पर अगर दिल न लगे तो पढ़ाई से ब्रेक लो, जबरदस्ती किताबें खोलकर न बैठे रहो…कई बार स्टूडेंट्स एक-दो बार में सेलेक्ट नहीं होते, ऐसे में हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। ऐसी स्थिति से निकलने की कोशिश करिए।’
