Delhi Violence CAA Protest: नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हुई हिंसा के बाद हिंसा पीड़ितों को ईदगाह के नजदीक बनाए गए राहत कैंप में रखा गया है। इस कैंप में रह रहे 62 साल के एक बुजुर्ग अमीन खान की बुधवार की रात मृत्यु हो गई। मौत से तीन दिन पहले ही अमीन खान और उनके परिवार के सदस्य इस कैंप में शिफ्ट हुए थे। अमीन खान, शिव विहार इलाके के रहने वाले थे। इस इलाके में जब भीड़ ने पत्थर और पेट्रोल बम फेंकना शुरू किया था तब वो अपने परिवार के साथ इस कैंप में शिफ्ट हो गए थे।
अमीन खान के परिवार के सदस्यों के मुताबिक हिंसा थमने के बाद अमीन खान वापस अपने घर गए थे यह देखने के लिए कि क्या अब वो वहां फिर से शिफ्ट हो सकते हैं? लेकिन वापस आने के बाद वो काफी तनाव में थे।
अमीन खान के 28 साल के बेटे आसिफ ने कहा कि ‘वापस आने के बाद उन्होंने करीब 1 घंटे तक हमसे बातचीत नहीं की। इसके बाद हमने उनसे जिद की कि वो हमसे बातचीत करें। उन्होंने कहा कि ‘हमारा घर जला दिया गया है और घर में रखे कीमती आभूषण और दूसरी वस्तुएं लूट ली गई हैं।
वो पूरी तरह से बिखर गए थे और थोड़ी देर बाद वो बेसुध होकर गिर गए। हम उन्हें लेकर मेहर क्लिनिक गए। जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। चिकित्सकों ने बताया कि उन्हें स्ट्रॉक पड़ा था।’
अमीन खान अपने पीछे अपनी पत्नी तीन बेटे, एक बेटी और सात पोता-पोती छोड़ गए हैं। अमीन खान अपने घर के पास एक चाय की दुकान चलाते थे। यह दुकान भी दंगाईयों ने इस हिंसा में जला दिया है। उनके बेटे ने कहा कि ‘हमें याद है कि जिस दिन हिंसा की शुरुआत हुई।
उस दिन हम बच्चों और अपने परिजनों को बचाने के लिए पिछले दरवाजे से भागकर अपनी बहन के घर गए। जब यह कैंप खोला गया तब हम यहां शिफ्ट कर गए। पिता जी सोचते थे कि सबकुछ ठीक हो जाएगा। घर घूमने के बाद वो शॉक्ड थे।’ बता दें कि 25 फरवरी को अमीन खान का परिवार मुस्तफाबाद में रहने वाली उनकी बेटी के घर पर शिफ्ट हो गया था।
इधर गुरुवार (05 मार्च, 2020) को हुई बारिश के बाद ईदगाह कैंप के अंदर पानी भर गया। एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि ‘रात करीब 9.30 बजे बारिश शुरू हुई। सड़क पर पानी लग गया था और पानी कैंप के अंदर घुस गया। बिस्तर और कम्बल गीले हो गए थे। हम रात में सोने के लिए सभी लोगों को नए बिस्तर उपलब्ध कराएंगे।’
अधिकारियों के मुताबिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यहां से लोगों को दूसरे कैंप में शिफ्ट नहीं किया जा सकता है। कैंप की व्यवस्था संभाल रहे वसीम नाम के एक शख्स ने बताया कि ‘हमने कैंप के अंदर कुछ टेबल रखे हैं…बिस्तर को इन टेबल पर रखा गया है ताकि उन्हें भींगने से बचाया जा सके।

