अपराधियों से सीधा पंगा लेने वाले बहादुर एनकाउंटर स्पेशलिस्ट अपने कारनामों की वजह से काफी सुर्खियां बटोरते हैं। हमने इस सीरीज में आपको देश के कई एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के बारे में बताया। आज हम जिस साहसी पुलिस वाले का जिक्र कर रहे हैं वो कभी ट्रक ड्राइवर भी रह चुके हैं। हम बात कर रहे हैं बहादुर अधिकारी अजीत ओगरे की। राष्ट्रपति वीरता पदक से सम्मानित अजीत ओगरे की कार्यशैली इतनी मशहूर है कि उन्हें आउट ऑफ टर्म प्रमोशन देकर पुलिस उपाधीक्षक बना दिया गया था।
बताया जाता है कि अजीत ओगरे पुलिस सेवा में आने से पहले रायपुर में रहते थे और हिन्दुस्तान लीवर लिमिटेड कंपनी का ट्रक चलाते थे। साल 2004 में उनका चयन पुलिस सब इंस्पेक्टर के तौर पर हुआ था। इस पद पर रहे हुए उन्हें बस्तर के जंगलों में हुआ था। नक्सल इलाके में पोस्टिंग मिलते ही इस अजीत ओगरे के साहसी कारनामे चर्चित हो गए।
50 से ज्यादा एनकाउंटर
अजीत ओगरे के बारे में कहा जाता है कि वो नक्सलियों के लिए काल हैं। नक्सली उन्हें अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानते हैं। जानकारी के मुताबिक अजीत ओगरे ने बस्तर के बीहड़ों में छिपे नक्सलियों से खुलकर पंगा लिया। उन्होंने 50 से ज्यादा एनकाउंटर कर कई खूंखार नक्सलियों को मौत के घाट उतार दिया। उनका खौफ नक्सलियों के बीच इस कदर है कि उनका नाम नक्सलियों ने अपनी हिटलिस्ट के टॉप-5 में शामिल कर ऱखा है। कई सरेंडर नक्सलियों ने तो पुलिस अफसरों को यह भी बताया है कि ओगरे को मारने के लिए नक्सलियों ने स्पेशल टीम भी बनाई है।
3 बार लगी गोली
एक बार अजीत ओगरे ने एक साक्षात्कार में कहा था कि उन्होंने पहली शादी एके-47 से की है, जो हमेशा उनके साथ रहती है। सोते समय भी वह बिस्तर पर बंदूक लेकर सोते हैं। निडरता के साथ नक्सलियों से लोहा लेने के लिए विख्यात अजीत ओगरे को 3 बार गोली भी लगी लेकिन वो एंटी नक्सली अभियान से कभी पीछे नहीं हटे हैं। आपको बता दें कि अजीत ओगरे को कई बार मैदानी इलाकों में पोस्टिंग का ऑफर भी मिला लेकिन यह साहसी अधिकारी नक्सली मोर्चे पर डटे रहना चाहते थे लिहाजा उन्होंने मैदानी इलाकों को छोड़ जंगलों में नक्सलियों का सफाया करने का बीड़ा उठाया।
अजीत आोगरे नक्सल विरोधी अभियान के दौरान बस्तर व राजनांदगांव जिला सहित अन्य जिलों में पदस्थ रहे। इस दौरान उन्होंने विभिन्न मुठभेड़ में लगभग 50 से ज्यादा माओवादियों को मार गिराया। इसके अलावा सामुदायिक पुलिसिंग के जरिए उन्होंने करीब 75 से अधिक नक्सलियों को आत्मसमर्पण कराया है। अजीत ने नक्सलियों के खिलाफ कई सफल ऑपरेशन का नेतृत्व भी किया है।
नक्सल प्रभावित राजनांदगांव जिले में अजीत ओगरे लंबे समय तक पदस्थ रहे। इस दौरान उन्हें नक्सल प्रभावित थाना मानपुर, मोहला छुरिया में टीआई का पदभार दिया गया था। इसके अलावा ओगरे सोमनी थाने के भी टीआई रहे। इस दौरान उन्हें नक्सल ऑपरेशन पर ही विशेष निरगानी की जिम्मेदारी दी गई थी।

