स्कूल में इस छात्र की पहचान एक बैकबेंचर के तौर पर थी। मिथुन कुमार ने एक बार साक्षात्कार में कहा था कि बैकबेंचर होने की वजह से स्कूल के टॉपर और शिक्षक उनकी तरफ नहीं देखते थे। लेकिन स्कूल का एक बैकबेंचर भविष्य का IPS बन जाएगा यह शायद उस वक्त किसी ने नहीं सोचा था। अपनी मेहनत और लगन से आईपीएस बन मिथुन कुमार ने उन्हें कमजोर समझने वाले लोगों को करारा जवाब दिया था।

छात्र जीवन में मिथुन कुमार यह खुद कभी नहीं सोचते थे कि वो अपनी जिंदगी में क्या हासिल करेंगे। जल्दी ही उन्हें यह समझ जरूर आ गई थी कि वो परिवार में बड़े हैं लिहाजा परिवार की मदद करने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर जरुर है। जब कभी भी वो अपने आसपास किसी पुलिस अधिकारी को देखते थे तब उनके जेहन में यह बात जरुर आती थी कि वो एक दिन इसी ओहदे पर होंगे।

एक आईपीएस अधिकारी बनने के बाद मिथुन कुमार ने कहा था कि वो अपने पिता से काफी प्रभावित हुए थे। परिवार की जिम्मेदारी संभालने के लिए मिथुन कुमार ने एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करना शुरू किया था। लेकिन वर्कप्लेस पर वो संतुष्ट नहीं थे। इसके बाद जल्दी ही मिथुन कुमार ने अपनी यह प्राइवेट नौकरी छोड़ दी। उनके भाई एक नामी फर्म में काम करते थे और इस फैसले को लेने में उन्होंने उनकी काफी मदद की थी।

करीब 3 साल तक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करने के बाद मिथुन कुमार ने अपनी नौकरी छोड़ी थी। मिथुन कुमार ने कहा था कि वो सोचते थे कि किसी तरह की इमरजेंसी में लोग या तो स्वास्थ्य केंद्र या फिर पुलिस अधिकारियों के पास ही भागते हुए जाते हैं। इसी वजह से उन्होंने यूपीएससी की तैयारी करने का फैसला किया था।

नौकरी छोड़ने के बाद मिथुन कुमार ने धीरे-धीरे यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। मिथुन कुमार ने 4 बार यूपीएससी की परीक्षा दी और वो पास नहीं हो सके। लेकिन मिथुन कुमार ने हिम्मत नहीं और साल 2016 में उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली।

मिथुन कुमार ने एक साक्षात्कार में कहा था कि ‘हमें कोई हरा नहीं सकता। हारना या जीतना दोनों हमारे दिमाग पर है। हमें निरंतर प्रयास करते रहने की जरूरत है। बिना प्रयास के हम नहीं जान सकते कि हम मंजिल के कितना करीब तक पहुंच सकते हैं।’ मिथुन ने कहा था कि मुश्किलें आएंगी लेकिन उनसे हारे बिना लड़ना होगा और आगे निकला होगा इसके बाद ही लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।