2012 Delhi Gang Rape and Murder Case: दिल्ली गैंगरेप के सभी दोषियों को शुक्रवार की सुबह 5.30 बजे फांसी दी गई। लेकिन उससे पहले गुरुवार की देर रात से लेकर शुक्रवार की अहले सुबह तक तिहाड़ जेल के अंदर और बाहर दोनों ही जगह पर हलचल काफी बढ़ी रही। चारों दोषियों को जब जेल के अंदर जगाया गया और जब उन्हें फांसी के तख्ते पर लटकाया गया तो इसके बीच ढाई घंटे का फासला था। हम आपको सिलसिलेवार बताते हैं कि जब 3.05 मिनट पर पवन, मुकेश, विनय और अक्षय को जेल में जगाया और जब 5.30 मिनट पर उन्हें फांसी दी गई तो इस ढाई घंटे के बीच क्या-क्या हुआ?
सुबह 3.04 मिनट पर उन्हें जगाने के बाद उन्हें फांसी पर चढ़ाने के लिए तय समय यानी 5.30 बजे की जानकारी दी गई। 3.50 मिनट पर तिहाड़ जेल प्रशासन ने फांसी की तैयारी शुरू कर दी। सुबह 4:00 बजे डीजी तिहाड़ संदीप गोयल जेल पहुंचे और पवन जल्लाद जेल नंबर तीन के फांसी घर में पहुंचा। इसी दौरान उप अधीक्षक जेल के कमरे से फांसी के रस्सी के बक्से लाए गए। 4:05 मिनट के आसपास जेल अधिकारियों की पवन जल्लाद के साथ बैठक शुरू हुई।
सुबह 4.11 मिनट पर सभी दोषियों को नया कुर्ता-पैजामा पहनने के लिए दिया गया। हालांकि एक दोषी पवन ने नए कपड़े पहनने से इनकार कर दिया। 4.17 मिनट पर डिप्टी सुपरीटेन्डेंट दोषियों के सेल में पहुंचे। 4.34 मिनट पर दोषी विनय ने जेल प्रशासन से कहा कि वो अपने वकील से बात करना चाहता है। लेकिन उसकी मांग पूरी नहीं की गई।
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सुबह 4.36 मिनट पर इन चारों दोषियों का मेडिकल टेस्ट जेल प्रशासन की तरफ से कराया गया। करीब 3 मिनट तक जांच करने के बाद चिकित्सकों ने सभी दोषियों को स्वस्थ घोषित किया। 4.42 मिनट पर सभी दोषियों को 10-15 मिनट का समय दिया गया ताकि वो अपने धर्म के मुताबिक अंतिम प्रार्थना कर सकें।
करीब दो मिनट बाद यानी 4.44 बजे से तिहाड़ जेल के बाहर लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। सुबह 5:00 बजे दोषियों के हाथ पीछे कर बांध दिये गये। हालांकि इस दौरान एक 2 दोषी हाथ बंधवाने के लिए तैयार नहीं थे फिर सुरक्षाकर्मी ने जबरदस्ती इनके हाथ बांधे। इस समय तक उनके चेहरे को नहीं ढका गया था।
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5:03 मिनट पर सभी दोषियों को फांसीघर की तरफ ले जाया जाने लगा। फांसी घर में पहुंचते ही पवन के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं और वो वहीं पर लेट गया। फिर उसे उठाकर फांसी के फंदे तक ले जाया गया।
इधर 5.20 मिनट पर तिहाड़ जेल के बाहर सुरक्षा और कड़ी कर दी गई। 5.26 मिनट पर चारों दोषियों के गर्दन में फंद कस दिया गया। ठीक 5.30 मिनट पर जेल प्रशासन की तरफ से इशारा मिलते ही पवन जल्लाद ने लीवर खींचा और चारों दोषी फांसी के फंदे पर झूल गए।

