वेंदाता ग्रुप के चेयरमैन और फाउंडर अनिल अग्रवाल ने शुरुआत शून्य से की थी। मेटल के छोटे से कारोबार से अपने सफर की शुरुआत करने वाले वेदांता फाउंडर ने आज 35000 करोड़ रुपये का साम्राज्य खड़ा कर दिया है। अनिल अग्रवाल का कारोबारी सफर हर युवा कारोबारी के लिए प्रेरणा है।
सीमित संसाधनों, शुरुआती संघर्ष और बड़े जोखिमों के बावजूद उन्होंने धैर्य, विज़न और लगातार सीखने की भावना के दम पर सफलता हासिल की। उनके फैसले, सोच और लीडरशिप स्टाइल से ऐसे कई बिजनेस सबक मिलते हैं जो आज के प्रतिस्पर्धी दौर में नए उद्यमियों को सही दिशा दिखा सकती हैं। आज हम आपको अनिल अग्रवाल की उन बिजनेस सीख के बारे में बता रहे हैं जिन्हें हर युवा उद्यमी को जरूर जानना चाहिए।
वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे का निधन, 75 प्रतिशत संपत्ति करेंगे दान
वेदांता फाउंडर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर युवा फाउंडर्स को सीख देते हुए लिखा, ‘प्रिय युवा संस्थापकों, मैं आपको कुछ चेतावनियों के बारे में बताना चाहता हूं जिसकी तरफ शायद ही कोई आपका ध्यान खींचता हो। आपने जो यात्रा चुनी है, वो एकाकीपन की तरफ जाता है। शुरुआती सालों में तो आपको ऐसा महसूस होगा, मानो आप प्रेशर कुकर में रह रहे हों। हर दिन आप जो निर्णय लेते हैं, वो आपके सपने को आगे बढ़ाता या फिर एक दम पीछे खींच लाता है। ऐसा लगता है, मानो शून्य में दहाड़ रहे हैं, मानो अंधेरे में कुछ निर्माण कर रहे हैं।’
मई 2025 में X अकाउंट पर की गई एक पोस्ट में उन्हों ने अपनी जिंदगी के संघर्ष के दौर के समय अकेलेपन से मिली सीख भी साझा की थी। उन्होंने बताया कि उनकी मां की शॉल उन्हें लंदन के फ्लैट में अपने घर की याद दिलाती रहती थी। वो लिखते हैं, ‘और, घनघोर एकाकीपन की रातों में वैसी कुछ चीजों पर गौर करो जो तुम्हें घर की याद दिलाए। मेरे लिए यह चीज मांजी की एक शॉल थी जिसके सहारे में लंदन के बर्फीली ठंड वाले फ्लैट में मैं घर को याद करता था।’
अनिल अग्रवाल की 5 प्रमुख व्यावसायिक सीखें:
धैर्य और दृढ़ता (Patience & Perseverance): सफलता तुरंत नहीं मिलती, इसमें समय लगता है। पांच साल भूल जाइए। मैंने पहले दस बरसों में रिजल्ट्स नहीं देखे। मगर, आख़िरकार चीज़ें आगे बढ़ने लगीं। पहले धीरे-धीरे। फिर एक साथ।
प्रतिबद्धता और निरंतरता (Commitment & Consistancy): यक़ीन मानिए, सफलता शुरुआत में अदृश्य-सी होती है। यह समय के साथ, धीरज से बनती है। और इसे हासिल करने तरीक़ा है – कमिटमेंट और कंसिस्टेंसी। बिना रुके, बिना थके, लगे रहना।
छोटी शुरुआत और सीख (Start Small, Learn from the Best): शुरुआत में छोटी पूंजी से काम करें, दिग्गजों से सीखें और फिर अपना रास्ता बनाएं। पैसे कमाना एक उप-उत्पाद (by-product) है, मेहनत ही मुख्य है। मेरी हर यंग फाउंडर को यही सलाह है – छोटी-सी शुरुआत ही करें, पर बस, बने रहें। ग्रोथ कर्व ऊंचा और नीचा होता रहता है, इस पर मजबूती से टिके रहेंगे तो एक-न-एक दिन यह आपको उठा लेता है।
असफलता से सीखें (Learn from Failures): अनिल अग्रवाल ने कई व्यवसाय शुरू किए और असफल रहे लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। हर असफलता से सीखकर आगे बढ़ना महत्वपूर्ण है।
लोगों को सशक्त बनाएं (Empower Your People): अपने CEO से लेकर ज़मीनी स्तर के कर्मचारी तक, सभी को साथ लेकर चलें और उन्हें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए सशक्त बनाएं। जादू यहीं होता है।
इनोवेशन और दक्षता (Innovation & Efficiency): हमेशा सोचें कि चीजों को और अधिक कुशलता से कैसे किया जा सकता है। कच्चे माल के आयात के बजाय उन्हें खुद बनाना, लागत और रोजगार के अवसर पैदा करता है।
अग्रवाल परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
साल 2026 की शुरुआत में ही वेदांता के चेयरमैन व परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके बेटे अग्निवेश अग्रवाल के निधन से पूरा परिवार गहरे सदमे में है।
49 साल के अग्निवेश अग्रवाल यूएस में स्कीइंग करते समय घायल हो गए थे। और पिछले कुछ दिनों से न्यूयॉर्क के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। लेकिन अचानक कार्डियक अरेस्ट के बाद उनका निधन हो गया। पूरी खबर पढ़ें…
