देश में वित्त वर्ष 2021-22 में लोग बड़ी संख्या में संपतियां जैसे घर, जमीन आदि में निवेश कर रहे हैं। इसी का परिणाम है कि देश के सभी राज्यों में स्टैंप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस कलेक्शन में बड़ा उछाल देखने को मिला है। इस वित्त वर्ष के पहले 8 महीनों में ही यह एक लाख करोड़ को पार कर गया है जबकि पिछले साल यह 1.27 लाख करोड़ रुपए था।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने राज्यवार आंकड़ों का विश्लेषण करके बताया है कि अप्रैल – नवंबर 2021 के बीच देश के 28 राज्यों का औसत मासिक संग्रह करीब 12,500 करोड़ था जो महामारी से पहले के औसत आंकड़े 12800 से थोड़ा सा ही काम है, जबकि इन आंकड़ों की पिछले वित्त वर्ष 2020-21 से तो यह औसत 1900 करोड़ रुपए अधिक है। पिछले साल औसत मासिक संग्रह करीब 10,600 करोड़ रुपए का रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार पिछले 8 महीनों में सबसे अधिक स्टैंप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस का संग्रह 17,097 करोड़ रुपए का महाराष्ट्र में हुआ है जो पिछले साल की तुलना में 17 फीसदी अधिक है। इसके बाद उत्तर प्रदेश का 12800 करोड़ रुपए, तमिलनाडु का 8700 करोड़ रुपए, कर्नाटक का 8400 करोड़ रुपए रहा।

यदि बात पिछले वित्त वर्ष 2020-21 की जाए तो इस इस दौरान महाराष्ट्र का संग्रह 25,427 करोड़ रुपए या 19.9 फीसदी, उत्तर प्रदेश का 16,475 करोड़ रुपए या 12.9 फीसदी, तमिलनाडु का 11,675 करोड़ रुपए या 9.1 फीसदी, कर्नाटक का 10,576 करोड़ रुपए या 8.3 फीसदी, तेलंगाना का 5,243 करोड़ रुपए, गुजरात का 7,390 करोड़ रुपए या 5.8 फीसदी और हरियाणा का 5,157 करोड़ या 4 फीसदी रहा।

वित्त वर्ष 21 में मध्यप्रदेश में 6760 करोड़ और राष्ट्रीय संग्रह का 5.3 फीसदी का संग्रह किया। बंगाल ने 5,527 करोड़ रुपए का या 4.3 फीसदी, आंध्र प्रदेश ने 5,603 करोड़ का या 4.4 फीसदी , राजस्थान 5,297 करोड़ या 4.1 फीसदी, बिहार 4,206 करोड़ या 3.3 फीसदी और केरला 3,489 करोड़ या 2.7 फीसदी का संग्रह किया जबकि बाकी अन्य राज्यों ने मिलकर 3000 करोड़ या कुल राष्ट्रीय औसत का 3 फीसदी का संग्रह किया।

ब्रोकरेज हाउस के मुख्य अर्थशास्त्री निखिल गुप्ता का कहना है कि रियल एस्टेट सेक्टर में वित्त वर्ष 2021 की दूसरी छमाही के बाद से तेजी आनी शुरू हुई थी जो वित्त वर्ष 2022 तक लगातार जारी रही है। आगे भी इस क्षेत्र में मजबूती रहने की उम्मीद है।