माकपा ने नोटबंदी के कारण अर्थव्यवस्था में अव्यवस्था के लिए केवल प्रधानमंत्री को जिम्मेदार माना और कहा कि संसद के बाहर लगातार उनके नीतिगत बयान देने के खिलाफ और सदन में चर्चा से भागने के लिए नए सिरे से अवमानना नोटिस दिया है। मोदी के आठ नवंबर की नोटबंदी घोषणा का उल्लेख करते हुए माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा हमारी अर्थव्यवस्था में समूची गड़बड़ी के लिए केवल प्रधानमंत्री जिम्मेदार हैं क्योंकि यह उनकी घोषणा थी और यह उनका निजी फैसला था, केंद्रीय कैबिनेट का नहीं। उन्हें सदन के लिए जिम्मेदार बनना चाहिए। संसद से वह भाग क्यों रहे हैं। यह उल्लेख करते हुए कि जब पीएमओ पर सवालों का जवाब सूचीबद्ध था, मोदी आज (गुरुवार, 8 दिसंबर) राज्यसभा में मौजूद नहीं थे, उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सदन में आने से बच रहे हैं लेकिन सार्वजनिक भाषणों में संसद के बाहर नीतिगत बयान दे रहे हैं। वह लगातार संसदीय तौर तरीकों और प्रक्रिया का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्होंने यहां कहा कि आज भी, स्पष्ट उल्लंघन हुआ जब क्रेडिट और डेबिट कार्ड लेनदेन पर सेवा कर माफी के बारे में (घोषणा) संसद के बाहर की गई। संसद को छोड़कर कहीं भी कर प्रस्ताव बनाया नहीं जा सकता। साथ ही कहा कि प्रधानमंत्री के प्रस्ताव के कारण देश की संचित निधि को अब कम सेवा कर प्राप्तियां होंगी। इसलिए यह संसद की अवमानना है। यहीं गतिरोध है। यह पूरी तरह से संसद के तौर तरीकों और प्रावधानों के खिलाफ है। मैंने आज फिर अपनी (अवमानना) नोटिस को प्रस्तुत किया है और (राज्यसभा) सभापति (हामिद अंसारी) से इस पर विचार करने और उन्हें व्यवस्था देने का अनुरोध किया है। विशेषाधिकार कमेटी की बैठक कल शुक्रवार (9 दिसंबर) को बुलायी गई है।

वित्त मंत्री अरुण जेटली के उस बयान का हवाला देते हुए कि कोई ऐसा प्रावधान नहीं है कि संसद में किसी चर्चा के वक्त प्रधानमंत्री को होना चाहिए, येचुरी ने कहा कि इस तरह की परंपरा रही है, तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह टू जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले पर दोनों सदनों में चर्चाओं में बैठते थे और इसका जवाब देते थे। उन्होंने आरोप लगाया लेकिन यहां तो प्रधानमंत्री चर्चा से भाग रहे हैं। येचुरी ने कहा कि 100 से ज्यादा लोगों की मौत पर लोगों की पीड़ा और भारी नकदी के साथ पकड़े गए कई भाजपा नेताओं के साथ ही नोटबंदी के प्रभाव के सभी पहलुओं पर गौर करने के लिए संयुक्त संसदीय कमेटी बनाने की मांग है जिसका संसद में कई प्रमुख विपक्षी दलों ने समर्थन किया है। माकपा नेता ने कहा कि मोदी के मुताबिक नोटबंदी के कदम का मकसद कालाधन, भ्रष्टाचार और जाली नोट से लड़ने का था। हालांकि, अब आरबीआई ने कहा है कि वापस लिए गए नकदी नोट के मूल्य का 82 प्रतिशत बैंकिंग तंत्र में वापस आ चुका है जो करीब 11.86 लाख करोड़ रुपए है और पुराने नोट 30 दिसंबर तक बदले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस दर पर, जाली मुद्रा के मूल्य से ज्यादा नोट जमा हुए हैं और बैंकिंग तंत्र में वैध हो चुके हैं। इस तरह प्रधानमंत्री ने सफलतापूर्वक काले धन को सफेद धन में बदल दिया और जाली मुद्रा को वैध बनाया। उनका कोई भी उद्देश्य पूरा नहीं हो पाया। उन्होंने साथ ही कहा-इससे जाली मुद्रा को वैध बनाने और कालेधन को सफेद में बदलने के जानबूझकर किए गए प्रयास का पता चलता है। फ्रांस की रानी मेरी एंटोइंटे के कुख्यात उद्धरण अगर आपके पास ब्रेड नहीं है तो केक खाइए का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी एंटोइंटे बन गए हैं क्योंकि वह कह रहे कि अगर आपके पास पेपर मनी नहीं है तो प्लास्टिक मनी का इस्तेमाल कीजिए जबकि भारतीय अर्थव्यवस्था का 98 प्रतिशत नकदी अर्थव्यवस्था है।