RBI, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने रेपो रेट बढ़ा दिया है। रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट का बदलाव किया गया है। मतलब ब्याज दर में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। इस बार अगस्त में हुई मीटिंग में बढ़ाया गया रेपो रेट पिछले 2 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। केंद्रीय बैंक का उद्देश्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) मुद्रास्फीति को 4% रखना है। रेपो दर बढ़ोतरी अपेक्षाओं के अनुरूप है। ब्लूमबर्ग द्वारा मतदान कराए गए 46 अर्थशास्त्रियों में से 33 ने 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की उम्मीद की थी। आरबीआई की अगस्त की मौद्रिक नीति निर्णय मुद्रास्फीति में वृद्धि, बैंक ऋण में वृद्धि और जमा वृद्धि, जीएसीज उपज में गिरावट, फॉरेन फंड आउटफ्लो और रुपए में की कीमत में आई गिरावट के आधार पर किया गया है। यह समीक्षा बैठक आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल की अध्यक्षता में हुई।
अब आरबीआई ने रेपो रेट 0.25 फीसदी बढ़ाकर 6.5 फीसदी कर दिया है। रेपो रेट वो रेट होता है जिस पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है। वहीं रिवर्स रेपो रेट भी 0.25 फीसदी बढ़कर 6.25 फीसदी हो गया है। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2019 में जीडीपी ग्रोथ अनुमान को 7.4 फीसदी पर बरकरार रखा है। आरबीआई के मुताबिक अप्रैल-सितंबर में जीडीपी ग्रोथ 7.5-7.6 फीसदी रहने का अनुमान है। वहीं, जुलाई-सितंबर के बीच महंगाई दर 4.2 फीसदी रहने का अनुमान है। अक्टूबर-मार्च के बीच महंगाई दर 4.8 फीसदी रहने का अनुमान है। मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी की अगली बैठक 3-5 अक्टूबर को होगी।
गौरतलब है कि आरबीआई ने अपनी पिछली समीक्षा बैठक में रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में 0.25 फीसदी का इजाफा किया था। यानी बीती दो बैठकों में आरबीआई ने नीतिगत दरों में कुल 0.50 बेसिस पॉइंट का इजाफा कर दिया है। आरबीआई ने जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए 4.2 फीसदी की दर से महंगाई का अनुमान लगाया है। वहीं अक्टूबर-मार्च छमाही के दौरान इसके 4.8 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है। आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने कहा कि साल 2018-19 में जीडीपी ग्रोथ रेट 7.4 फीसदी रहने का अनुमान है। वहीं, 2019-20 की पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 7.5% रहने का अनुमान है।

