खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि मैगी विवाद की वजह से सरकार देश में निवेश का प्रवाह प्रभावित नहीं करना चाहती है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि सभी तथ्य सामने आने तक मैगी विवाद पर अनावश्यक हो हल्ला करने के बजाय शालीनता बरने की जरूरत नहीं है।
पासवान ने खाद्य उत्पादों के विनियमयम के मामले में एक-दूसरे से गडमड होने वाले मुद्दों से निपटने के लिए एकल संयोजित निकाय की वकालत की। इससे विभिन्न मंत्रालयों से खाद्य क्षेत्र में उत्पाद मंजूरियों में तेजी लाई जा सकेगी। वह यहां एसोचैम के कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने मैगी विवाद पर कहा, ‘‘परसों प्रधानमंत्री ने कहा कि लोग कुछ भी कहते रहें हम इस मुद्दे :मैगी:पर शालीनता बरतें। जब तक हमें पूरे तथ्य नहीं मिल जाते अनावश्यक हल्ला गुल्ला करने की जरूरत नहीं है।’’
मंत्री ने खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को भरोसा दिलाया कि सरकार का इरादा इंस्पेक्टर राज कायम करने और क्षेत्र में निवेश का प्रवाह प्रभावित करने का नहीं है। हालांकि उन्होंने प्रतिनिधियों से उत्पादों की गुणवत्ता कायम रखने और ईमानदारी व पारदर्शिता से कारोबार करने को भी कहा। उन्होंने कहा कि सरकार औद्योगिक वृद्धि हासिल करना चाहती है लेकिन उपभोक्ता हितों की कीमत पर नहीं। उद्योग यह सुनिश्चित करें कि उत्पाद बेहतर गुणवत्ता के हों।
पासवान ने कहा, ‘‘हम प्रत्येक विभाग के अलावा प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखेंगे कि उद्योग द्वारा उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से देखने की जरूरत है। पासवान ने कहा कि मैगी विवाद पर ‘मीडिया ट्रायल’ चल रहा है। उन्होंने मैगी के नमूनों की कुछ प्रयोगशालाओं द्वारा परीक्षण के बाद उन्हें खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप बताने औार बाद में नियामक एफएसएसएआई द्वारा इन रपटों को खारिज करने पर भी अपनी राय रखी।
उन्होंने कहा कि मैगी को लेकर जनता ने अवधारणा बनाई है। यदि जनता का भरोसा एक बार टूटता है तो उसे फिर बना पाना मुश्किल होता है। इन दिनों बड़े रूप में मीडिया ट्रायल चल रहा है। कुछ ऐसा ही कोका कोला के मामले में हुआ था।
उन्होंने कहा कि यदि किसी उत्पाद के साथ स्वास्थ्य संबंधी मुद्दा होता है, तो उपभोक्ता प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि जब इस तरह का विवाद प्रकाश में आता है तो संसदीय लोकतंत्र में आलोचना होती है।
इस साल जून में एफएसएसएआई ने मैगी नूडल्स के 30 नमूनों को मानव के खाने के लिए असुरक्षित पाए जाने के बाद इस पर प्रतिबंध लगा दिया था। एफएसएसएआई ने यह भी कहा था कि नेस्ले ने स्वाद बढ़ाने वाले एमएसजी पर लेबलिंग नियमों का भी उल्लंघन किया था और कंपनी को अपने आदेश पर अनुपालन रिपोर्ट देने को कहा था।
