प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्योगों से खासकर रोजगार सृजित करने वाले क्षेत्रों में जोखिम उठाने और निवेश बढ़ाने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा है कि सरकार देश में कारोबार को सुगम बनाने के साथ-साथ सार्वजनिक निवेश बढ़ाने और वैश्विक पूंजी आकर्षित कर अर्थव्यवस्था में तेजी लाने पर ध्यान दे रही है।
प्रधानमंत्री मंगलवार को यहां उद्योगपतियों, कारोबारियों, बैंक प्रमुखों और अर्थशास्त्रियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में वैश्विक अर्थव्यवस्था की उठा-पटक को भारत के लिए अवसर में बदलने पर चर्चा की गई। बैठक में कहा गया कि इस उठा-पटक का भारत पर प्रभाव बहुत कम होगा। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने निवेश की लागत में कमी लाने के लिए ब्याज दरों में कटौती की वकालत की।
बैठक के बाद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि करीब तीन घंटे चली बैठक में ताजा वैश्विक घटनाक्रमों, उनका भारत पर प्रभाव और ऐसी स्थिति में अवसर पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि बैठक में शामिल लोगों का मानना था कि वैश्विक स्थिती खासकर पूंजी और मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव कुछ समय के लिए ही है। इसलिए घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के कदम उठाए जाने चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कम लागत वाले निर्माण पर जोर देते हुए कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की ताकत देश का विशाल मानव संसाधन और घरेलू बाजार के आकार में निहित है। उन्होंने कहा कि देश निर्यात बाजार पर पूरी तरह निर्भर नहीं है। जेटली के मुताबिक प्रधानमंत्री ने लघु और मझोले उद्यमों पर जोर दिया। उन्होंने मनरेगा कोष का उपयोग कौशल विकास के लिए एक संभावित उपकरण के रूप में करने पर बल दिया। उन्होंने असंगठित क्षेत्र की सहायता के लिए मुद्रा बैंक की सुविधाओं के उपयोग पर जोर दिया। जेटली ने कहा कि राजकाज में पारदर्शिता से निर्णय में तेजी आएगी।
बैठक में उद्योग जगत से रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मुकेश अंबानी, टाटा समूह के प्रमुख सायरस पी मिस्त्री, आदित्य बिड़ला समूह के प्रमुख कुमार मंगलम बिड़ला, भारती एअरटेल के सुनील भारती मित्तल और आइटीसी के प्रमुख वाय सी देवेश्वर मौजूद थे। रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन, आइसीआइसीआइ बैंक की मुख्य कार्यकारी चंदा कोचर, एसबीआइ की अध्यक्ष अरुंधती भट्टाचार्य भी बैठक में शामिल थीं। बैठक में अर्थशास्त्री सुबीर गोकर्ण, मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियम और नीति आयोग के चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया भी मौजूद थे।
उद्योग जगत की नीतिगत ब्याज दरों में कटौती की मांग पर वित्त मंत्री ने कहा कि मौद्रिक नीति निर्धारण का अधिकार रिजर्व बैंक के पास है। बैठक में यह माना गया कि वैश्विक घटनाक्रमों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रभाव बहुत कम होगा क्योंकि घरेलू अर्थव्यवस्था की आधारभूत स्थिति तार्किक रूप से मजबूत है। इसलिए वे चाहते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था के मानदंडों को और सशक्त बनाने की दिशा में कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि सरकार अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए विभिन्न उपायों पर गौर कर रहे हैं।
इन उपायों में बुनियादी ढांचा में निवेश, सिंचाई, कारोबार को आसान बनाने और वैश्विक निवेश आकर्षित करना, निजी क्षेत्र से निवेश प्राप्त करना शामिल है। जेटली ने कहा कि घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए बुनियादी ढांचे पर निवेश बढ़ाने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र पर ध्यान बढ़ाना महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र की हालत में सुधार से बड़ी संख्या में लोगों की क्रय शक्ति बढ़ेगी। इसके लिए खाद्य प्रसंस्करण, कपड़ा और पर्यटन के क्षेत्र में जोर दिया गया है।
जेटली ने कहा कि बैठक में आए सुझावों में सिंचाई पर खर्च बढ़ाना, खाद्य प्रसंस्करण पर जोर, ढांचागत सुविधा के निर्माण के लिए निवेश प्रक्रिया में तेजी लाना शामिल हैं। इसके अलावा श्रम और पूंजी की लागत और अटकी पड़ी परियोजनाओं पर भी सुझाव आए। जेटली के मुताबिक बैठक में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने माना कि बड़ी संख्या में कर मामलों का समाधान हुआ है। लेकिन जीएसटी समेत बचे हुए सुधारों को क्रियान्वित करने की उम्मीद जताई गई। उद्योग जगत ने दो और विधायी कदमों पर जोर दिया। इनमें से एक दिवालिया संहिता से संबद्ध और दूसरा भ्रष्टाचरण निरोधक कानून के तहत भ्रष्टाचार की परिभाषा है। इस पर सरकार पहले ही कदम उठा चुकी है।
