केन्द्र सरकार ने कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड में रणनीतिक विनिवेश के फैसले को अपनी मंजूरी दे दी है। सरकार के इस फैसले का कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की कर्मचारी यूनियन CONCOR द्वारा विरोध किया जा रहा है। सरकार के फैसले से कंपनी के कर्मचारियों में डर का माहौल है। कर्मचारी यूनियन का कहना है कि सरकार के फैसले से बड़ी संख्या में नौकरियां जा सकती हैं। बता दें कि कंटेनर कॉरपोरेशन भारतीय रेलवे की PSU कंपनी है।
हाल ही में कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनोमिक अफेयर्स की बैठक हुई थी। इस बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई। इस बैठक में सरकार ने कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया कंपनी में से रणनीतिक विनिवेश को सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। इसके तहत सरकार कंपनी में से अपनी 30.8 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी। अभी कंपनी में सरकार का हिस्सा 54.8% है। इसके साथ ही सरकार कंपनी के मैनेजमेंट को रणनीतिक साझेदार को ट्रांसफर करेगी।
कंपनी की कर्मचारी यूनियन CONCOR ने एक बयान जारी कर कहा है कि कंटेनर कॉरपोरेशन रेलवे की इकलौती नवरत्न कंपनी है और यह अपने 83 टर्मिनलों के माध्यम से पैन इंडिया में निर्यात / आयात को बढ़ावा देकर अर्थव्यवस्था के संतुलन के विकास के लिए एक अहम संगठन है। कर्मचारी यूनियन के अनुसार, इनमें से 43 टर्मिनल रेलवे की जमीन पर हैं, जिनकी अनुमानित लागत 25 हजार करोड़ रुपए है।
कर्मचारी यूनियन ने कहा कि करीब 10 लाख लोग CONCOR से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से जुड़े हुए हैं। ऐसे में कंपनी में विनिवेश के फैसले से 10 लाख परिवार प्रभावित होंगे। यदि विनिवेश किया जाता है तो कंपनी की जमीन निजी हाथों में चली जाएगा, जबकि सरकार को 30.8 प्रतिशत रणनीतिक विनिवेश से सिर्फ 10,780 करोड़ रुपए ही मिलेंगे। यूनियन के सदस्यों का कहना है कि 1989-90 में सरकार ने CONCOR को कैपिटल के लिए 65 करोड़ रुपए दिए थे। उसके बाद से आज तक कंपनी सरकार को 8000 करोड़ रुपए सीधे तौर पर दे चुकी है।
वित्तीय वर्ष 2018-19 में कंपनी का टर्नओवर 7216.14 करोड़ रुपए था। इसमें से 1689 करोड़ रुपए कंपनी का लाभ था। यूनियन के सदस्यों का कहना है कि कंपनी के कर्मचारी इसके प्रमुख हिस्सेदार हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत के बल पर कंपनी को ऊंचाईयों पर पहुंचाया, अब जब विनिवेश का फैसला किया जा रहा है तो कर्मचारियों से बात भी नहीं की गई है। पीटीआई से बातचीत में CONCOR कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष बिनय कुमार चौधरी ने कहा कि कर्मचारी अचानक होने वाले इस बदलाव, सर्विस कंडीशन और अपने अधिकारों को लेकर डरे हुए हैं।

