देश के बीमा नियामक ने कहा कि सहारा इंडिया लाइफ इंश्योरेंस ने सुरक्षा जमा राशि के नाम पर 78 करोड़ रुपये का गबन किया है। भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने शुक्रवार को आईसीआईसीआई प्रू को सहारा बीमा का अधिग्रहण करने को कहा। आईआरडीएआई ने कहा कि सहारा इंडिया लाइफ इंश्योरेंस कंपनी उचित व्यक्ति के हाथों में नहीं है, इसलिए उसकी सभी बीमा पॉलिसियों को आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ को 31 जुलाई तक हस्तांतरित करने का आदेश दिया है।
आईआरडीएआई ने इसके अलावा सहारा इंडिया लाइफ को आदेश दिया कि वह नियामक के नियंत्रण वाले खाते में 25 करोड़ रुपये अलग से हस्तांतरित करे, ताकि एक साल बाद किसी रिफंड के लिए या किसी आकस्मिक खर्च को पूरा करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सके।
आईआरडीएआई की वेबसाइट पर अपलोड किए गए आदेश में उसके अध्यक्ष टी. एस. विजयन ने कहा कि सहारा इंडिया लाइफ के लिए नियुक्त व्यवस्थापक की रिपोर्ट के अनुसार, 78 करोड़ रुपये की राशि पहले से ही ‘सुरक्षा जमा राशियों के नाम पर गबन कर दिया गया है’ और प्रमोटर कंपनी चलाने योग्य नहीं है।
शेयरधारकों और कंपनी का बोर्ड उनसे यह पैसे वसूलने की उत्सुक नहीं है और कंपनी मुख्य रूप से रिजर्व पर ही चल रही है। इसमें कहा गया कि हालांकि ऐसी स्थिति ज्यादा दिन तक नहीं रहेगी और नई प्रीमियम की दर काफी कम होगी।
बता दें कि यह कोई पहली दफा नहीं है जब सहारा को झटका लगा है। इससे पहले 25 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह के मुखिया सुब्रत राय को सात सितंबर तक सेबी-सहारा धन वापसी खाते में 1500 करोड़ रुपए जमा कराने का निर्देश दिया था।
न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एके सिकरी की तीन सदस्यीय खंडपीठ को सुब्रत राय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सूचित किया कि सहारा प्रमुख ने 552.21 करोड़ रुपए के वायदे, जिसे 15 जुलाई तक जमा कराना था, के बाद 247 करोड़ रुपए जमा कराये हैं। सिब्बल ने कहा कि 552.21 करोड़ रुपए में से बची शेष 305.21 करोड़ रुपए की रकम 12 अगस्त तक जमा करा दी जायेगी।

