जीएसटी विधेयक को रोकने के मामले में कांग्रेस पर ‘विघ्नकारी रवैया’ अपनाने का आरोप लगाते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि इस विधेयक पर असहमति के जो बिंदु उठाए जा रहे हैं उनको संप्रग सरकार में वित्त मंत्री रहे- पी. चिदंबरम और प्रणब मुखर्जी, दोनों में से एक का भी समर्थन नहीं है।
जेटली ने कहा कि कांग्रेस ‘राजनीतिक कारणों’ से सरकार से परेशान हो सकती है, लेकिन उसे गहराई से यह आत्मविश्लेषण करना चाहिए कि उसकी नकारात्मक सोच एवं ‘विघ्नकारी रवैये’ से देश और देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा।
कांग्रेस द्वारा असहमति के संबंध में सामने रखे गए आठ मामलों को बिंदुवार खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने पूर्ववर्ती संप्रग सरकार द्वारा स्वीकारे गए जीएसटी विधेयक में ‘कोई महत्वपूर्ण बदलाव’ नहीं किया है और इसका कांग्रेस शासित प्रदेशों द्वारा भी समर्थन किया गया है।
उन्होंने माना कि 18 प्रतिशत जीएसटी दर को लेकर कांग्रेस की मांग में दम हो सकता है। जेटली ने कहा कि इस पर जीएसटी परिषद द्वारा निर्णय किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में एक ही बड़ा संशोधन किया गया है और वह ‘‘ विनिर्माणकर्ता व उपभोक्ता राज्यों के बीच सहमति बनाने के लिए है।’
वित्त मंत्री जेटली ने अपने फेसबुक पेज पर डाले पोस्ट में लिखा है, ‘‘केवल बिघ्न डालने के लिए कांग्रेस पार्टी ने यह नकारात्मक रच्च्ख अपना रखा है। चूंकि संसद काम नहीं कर पा रही है और इन बिंदुओं पर संसद के सामने स्पष्टीकरण देने का कोई रास्ता नहीं है, इसी लिए मैं उपरोक्त तथ्यों को लोगों के सामने रखने :इस तरह: प्रस्तुत करने को लाचार हूं।’’
जीएसटी परिषद में राज्यों का मताधिकार बढ़ाकर तीन चौथाई करने का कांग्रेस का प्रस्ताव खारिज करते हुए जेटली ने कहा, ‘‘ क्या कांग्रेस का यह प्रस्ताव है कि केन्द्र आर्थिक रूप से जी न सके। क्या यह उनका प्रस्ताव है कि राष्ट्रीय कराधान प्रणाली में केन्द्र की कोई आवाज न बचे।’
‘‘लगता है कि कांग्रेस ने ठीक से दिमाग लगाए बगैर यह प्रस्ताव किया है। कांग्रेस पार्टी और उसके नेता हो सकता है कि राजनीतिक कारणों से सरकार से परेशान हों। वे 2014 में मिले जनादेश से परेशान हों सकते हैं।’’
‘‘कांग्रेस को मानना चाहिए और देश में सबसे लम्बे समय तक शासन करने के बाद गंभीरता से आत्मविश्लेषण करना चाहिए कि नकारात्मक सोच से देश का नुकसान होता है। क्या उसके विघ्नकारी रवैए से देश को आर्थिक क्षति पहुंचनी चाहिए.. ’’
वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘यह कांग्रेस की ही सरकार थी जिसने 2006-07 के बजट में जीएसटी का प्रस्ताव किया था और संविधान में संशोधन भी संप्रग द्वारा ही रखे गए थे। उस समय अधिकार प्राप्त समिति और स्थायी समिति द्वारा बदलाव के संबंध में किए गए सुझाव भी संप्रग सरकार द्वारा स्वीकार किए गए थे।’’
एक अप्रैल, 2016 से जीएसटी के लागू होने के लिए संसद को मौजूदा मानसून सत्र में संविधान संशोधन विधेयक को मंजूरी देनी होगी जिसके बाद 30 राज्यों में से आधे को इसे मंजूरी देनी होगी। हालांकि, ललित मोदी विवाद और व्यापम घोटाले के मुद्दे पर हंगामे के चलते दो सप्ताह से संसद का कामकाज बार बार ठप बाधित होता रहा है।
जेटली ने कहा है कि इस विधेयक का तर्क देश में जटिल अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को सरल बनाना है।
