वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि जिंसों के दाम नीचे हैं और खरीफ फसल की संभावनायें बेहतर हैं, ऐसे में रिजर्व बैंक के लिये ब्याज दरों में और कटौती के लिये अनुकूल परिस्थितियां हैं।
जेटली से जब यह पूछा गया कि क्या रिजर्व बैंक के लिये ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश है? जवाब देते हुये उन्होंने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि मेरे पास कई सकारात्मक उम्मीदें हैं। ऐसे में उम्मीद की गुंजाइश है।’’
उन्होंने कहा कि विश्व बाजार में कच्चे तेल के दाम भारत के लिहाज से ‘‘जितने बेहतर हो सकते हैं उतने ठीक हैं। दुनियाभर में जिंसों के दाम आमतौर पर नीचे हैं। इंद्र देवता भी इस साल हम पर मेहरबान हैं ….।’’
सीएनबीसी टीवी18 पर साक्षात्कार में जेटली ने कहा की उदार मौद्रिक नीति के लिये चीजें अनुकूल हैं। उन्होंने कहा कि मॉनसूनी वर्षा में यदि थोड़ी बहुत कमी रहती भी है तो इसका भौगोलिक रूप से विस्तार और समय ऐसा है कि ‘‘हमें बहुत अच्छी फसल की उम्मीद है।’’
उन्होंने कहा कि खाद्य मुद्रास्फीति नियंत्रण में है। रिजर्व बैंक ने चार अगस्त को इस साल की तीसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा की जिसमें उसने नीतिगत दर को यथावत बनाये रखा। हालांकि, केन्द्रीय बैंक ने कहा कि वह वृहद आर्थिक आंकड़ों को देखते हुये अगली समीक्षा से पहले दर में कटौती कर सकता है। इस साल जनवरी के बाद से अब तक केन्द्रीय बैंक तीन किस्तों में नीतिगत दर में 0.75 प्रतिशत कटौती कर चुका है।
जेटली ने कहा, ‘‘रिजर्व बैंक एक पेशेवर संगठन है। यह एक संस्थान है और कोई भी संस्थान कई बातों को लेकर विचार करता है।’’ उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक भी अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर उतना ही सोच विचार करता है जितना कि सरकार। इसलिये वह सोच विचार कर फैसला करेगा।
सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश पर पूछे गये सवाल पर वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार के पास इसका पूरा कार्यक्रम है लेकिन इसे पहले से नहीं बताया जा सकता। ऐसा होने पर ‘‘आप देखेंगे कि शेयर बाजार में कई तरह की गतिविधियां शुरू हो जातीं हैं और फिर इनका उनपर खासतौर से निशाना होता है।’’
जेटली ने कहा, ‘‘इसमें कुछ आश्चर्य वाली बात भी है जो हम बाजार को देना चाहते हैं, इसलिये कृपया कुछ सप्ताह प्रतीक्षा कीजिये।’’ उन्होंने कहा कि विनिवेश को आगे बढ़ाते समय सरकार को सभी बाजार परिस्थितियों को ध्यान में लेना होता है।
सरकार ने सार्वजनिक उपक्रमों में विनिवेश से 69,500 करोड़ रुपए जुटाने का कार्यक्रम बनाया है। वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) के संविधान संशोधन विधेयक के बारे में जेटली ने उम्मीद जताई कि ‘‘बेहतर समझ’’ बनेगी और विपक्ष सरकार को इस अप्रत्यक्ष कर सुधारों को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।
जीएसटी लागू करने के लिये क्या सरकार नई समय सीमा तय करने के बारे में सोच रही है? जेटली ने कहा उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी है। उन्होंने कहा, ‘‘यह मेरा काम है कि मैं इसे पूरी गंभीरता के साथ आगे बढ़ाऊं। राजनीति में कई और विकल्प उपलब्ध हैं … मैं कहूंगा कि एक अप्रैल 2016 उपयुक्त समयसीमा है। न केवल केन्द्र सरकार बल्कि राज्य सरकारों भी इस समय सीमा को चाहती हैं।’’
सरकार की जीएसटी को एक अप्रैल 2016 से लागू करने की योजना है। जीएसटी संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा से पारित हो चुका है। राज्यसभा से पारित होने के बाद आधी राज्य विधानसभाओं में भी इसे अंगीकार करना होगा।
