वित्त मंत्री अरुण जेटली ने चीन की अर्थव्यवस्था में सुस्ती का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के लिए वैश्विक स्तर का विनिर्माण केन्द्र बनने का अच्छा मौका है लेकिन उन्होंने इस बात पर खिन्नता प्रकट की विपक्षी कांग्रेस पार्टी प्रस्तावित नयी अप्रत्यक्ष कर प्रणाली जीएसटी पेश नहीं करने दे रही है। वित्त मंत्री का कहना है कि केवल जीएसटी लागू होने से ही सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) एक से दो प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है।
वित्त मंत्री ने लोकसभा में कहा कि भारत आठ प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि हासिल कर सकता है। सरकार निवेश बढ़ाने के लिये अनेक कदम उठा रही है। अटकी पड़ी पुरानी परियोजनाओं को चालू किया जा रहा है और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में और पूंजी डाली जा रही है। इसके अलावा, ‘‘इंद्र देवता की भी इस साल कृपा बनी हुई है जिससे अच्छी फसल होने की उम्मीद है।’’
जेटली अनुपूरक अनुदान मांगों पर हुई चर्चा का उत्तर दे रहे थे। इस दौरान कांग्रेस के साथ साथ कई अन्य विपक्षी दलों ने सदन का बहिष्कार किया। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने चार साल में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 70,000 करोड़ रुपए डालने का फैसला किया है। इसके अलावा ये बैंक 1.10 लाख करोड़ रुपए बाजार से जुटायेंगे। इससे ये बैंक आर्थिक वृद्धि में मजबूती के साथ अपना योगदान दे सकेंगे।
वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘यदि मेरे मित्रगण (कांग्रेस सदस्य), जो आज (बुधवार) सदन में उपस्थित नहीं है, जीएसटी को अमल में लाने दें, जिसे उन्होंने खुद ही पेश किया था तो देश में कर की दरें एक समान होंगी, एक साझा बाजार होगा और यह सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) को एक से दो प्रतिशत वृद्धि बढ़ा सकता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यदि बैंकों में नई पूंजी डाल दी जाये, जीएसटी का क्रियान्वयन हो जाये और अटकी पड़ी परियोजनायें चालू हो जायें तथा ढांचागत क्षेत्र के खर्च में सुधार हो तो हम प्रतिकूल परिस्थितियों में भी आठ प्रतिशत वृद्धि को छू सकते हैं।’’
जीएसटी विधेयक राज्यसभा में अटका पड़ा। कई मुद्दों पर विपक्ष के हंगामें के कारण राज्यसभा में कामकाज नहीं हो पा रहा है। जीएसटी व्यवस्था लागू होने से पूरे देश में अप्रत्यक्ष करों की एकसमान व्यवस्था लागू हो जायेगी।
चीन की अर्थव्यवस्था की बात करते हुये जेटली ने कहा कि दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था इस समय सुस्त पड़ गई है। वहां वेतन को बोझ बढ़ गया है जिससे उनके उत्पादों की लागत भी बढ़ गई है।
जेटली ने कहा इस स्थिति में हम विनिर्माण गतिविधियों का बड़ा केन्द्र बन सकते हैं। उसके बाद ही भारतीय अर्थव्यवस्था की पूरी क्षमता का इस्तेमाल हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारत निरंतर 8 प्रतिशत की वृद्धि का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में आज यह ‘‘चमकता आकर्षक स्थल’’ है।
देश की आर्थिक वृद्धि पिछले साल 7.3 प्रतिशत रही और रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिये 7.6 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान रखा है। जेटली ने कहा, ‘‘ऐसे वैश्विक परिवेश में जहां हवा का रुख अनुकूल नहीं है, पिछले कुछ वर्षों के दौरान हम आर्थिक वृद्धि के लिहाज से काफी नीचे आ चुके हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम अर्थव्यवस्था में सुधार ला रहे हैं और यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम वृद्धि दर को बढ़ाने में सहयोग करें।’’
उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्थायें चुनौती का सामना कर रही है और चीन जैसी उच्च वृद्धि वाली अर्थव्यवस्थाओं के लिये भी अब 7 प्रतिशत अथवा इससे कम वृद्धि सामान्य हो गई है।
जेटली ने कहा, ‘‘इस साल हम आठ प्रतिशत आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। विश्व की अर्थव्यवस्थाओं के लिए इस मुश्किल दौर में भारत एक ‘आकर्षक जगह है।’उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले वित्त वर्ष में 7.3 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की और रिजर्व बैंक ने इस वर्ष 7.6 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया है।
वित्त मंत्री ने कहा जब हम ऊंची वृद्धि हासिल करेंगे तो राजस्व में भी वृद्धि होगी। इस साल के शुरुआती कुछ महीनों के दौरान कुछ बेहतर संकेत दिखे हैं और इनमें से एक बेहतर संकेत अप्रत्यक्ष करों के राजस्व में दिखाई दिया है।’’
बैंकिंग क्षेत्र की चिंता के बारे जेटली ने कहा कि गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों में इस्पात, बिजली और राजमार्ग क्षेत्र का सबसे बड़ा हाथ है। उन्होंने कहा, ‘‘हमें ऐसी अर्थव्यवस्था मिली जहां बैंकों का एनपीए 6 प्रतिशत पर था। इसके अलावा और छह प्रतिशत की ऐसी परिसंपत्ति थी जो तनावग्रस्त थी। उनमें कुछ दबा-छुपा एनपीए भी हो सकता है। इसलिये हमने बैंकों को नई पूंजी उपलब्ध कराने का फैसला किया। सरकार ने करदाताओं के पैसे को बैंकिंग प्रणाली में डालने का फैसला किया।’’
उन्होंने कहा कि जब शुरुआती पूंजी आयेगी तो बैंक मजबूत बनेंगे और उसके बाद ये बैंक भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि को आगे बढ़ाने में अपना योगदान देंगे।
बाहरी मोर्चे पर भी स्थिति तर्कसंगत बनी हुई है। देश में विदेशी मुद्रा का रिकार्ड भंडार है। वर्ष के शुरुआती कुछ महीनों में एफडीआई में 49 प्रतिशत वृद्धि हुई है। चालू खाते का घाटा (कैड) नियंत्रण में है। इस लिहाज से हम सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं में अधिक धन खर्च कर सकते हैं।
पहली तिमाही में पूंजी व्यय 17.6 प्रतिशत बढ़ गया और ढांचागत परियोजनाओं में निवेश इस साल 70,000 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है।
पिछली संप्रग सरकार के कामकाज पर कटाक्ष करते हुये जेटली ने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली इस सरकार के आखिरी तीन सालों के दौरान रोचक लेखा प्रणाली सामने आई। बजट में आवंटन तो काफी बढ़ाकर रखा गया लेकिन बाद में इसमें भारी कटौती की गई और संशोधित अनुमान काफी नीचे रहे।
उन्होंने कहा कि इस साल सरकार का प्रयास है कि बजट अनुमान और संशोधित अनुमान में कोई अंतर नहीं हो। बल्कि संशोधित अनुमान, बजट अनुमान से कुछ बेहतर ही होंगे।
जेटली ने खेद व्यक्त करते हुये कहा कि चर्चा के दौरान विपक्ष के सदस्य सदन में उपस्थित नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे साथी ऐसा माहौल बनायेंगे जिससे कि विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हो सके। यदि मेरे कुछ साथी जो कि आज उपस्थित नहीं है मुझे जीएसटी को अमल में लाने दें, तो इससे खपत वाले राज्यों को लाभ होगा। ओडिशा सहित समूचे पूर्वी क्षेत्र को इसका फायदा होगा।’’
कुछ राज्यों में बाढ़ की स्थिति पर उन्होंने कहा, ‘‘हम उम्मीद करते हैं कि हालात ठीक रहेंगे।’’ उन्होंने कहा, सिंचाई सुविधाओं पर काफी खर्च करने की जरूरत है और प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के तहत इसके लिये 50,000 करोड़ रुपए रखे गये हैं।
उन्होंने आगे कहा कि देश में 8 से 9 प्रतिशत वृद्धि हासिल होने पर राज्यों को अधिक राजस्व मिलेगा, इस मामले में हम किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं करेंगे।
