नई दिल्ली, 8 दिसंबर। नकदी संकट से जूझ रहे देश को नकदी रहित अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए गुरुवार (8 दिसंबर) को सरकार ने कई नए कदम उठाने का ऐलान किया। नकदी लेनदेन कम करने और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के उपायों सुझाने के लिए गठित मुख्यमंत्रियों, सभी बैंकों के शीर्ष अधिकारियों और आर्थिक विशेषज्ञों की कमेटी की मुंबई स्थित रिजर्व बैंक के मुख्यालय में दिन भर बैठक चली। उसके बाद नई दिल्ली में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 11 सूत्री कार्यक्रमों की घोषणा की, जिन्हें पहली जनवरी से लागू किया जाना है। दो हजार रुपए तक के सभी डिजिटल ट्रांजेक्शंस पर सेवा कर नहीं लगेगा। नोटों को अमान्य किए जाने के बाद देश भर में नकदी के लिए अफरा-तफरी जारी है। बीते आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच सौ और एक हजार रुपए के नोटों को अमान्य करने का ऐलान किया था। काला धन, कालाबाजारियों, जमाखोरों, आतंकियों और उग्रवादियों के पास मौजूद धन को बेकार करने का तर्क देकर विमुद्रीकरण की घोषणा की गई थी। अब एक महीने बाद इसका नतीजा जबरदस्त नकदी संकट के रूप में सामने आया है तो सरकार ने नकदी की जरूरत ही खत्म करने की बात उठा दी है। रिजर्व बैंक की उप समिति के सुझावों के आधार पर सरकार अब डिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहित करने की बात कर रही है। मुख्यमंत्रियों की कमेटी की बैठक में जो सुझाव आए, उनके आधार पर फिलहाल 11 छूटों का ऐलान किया गया है।
अरुण जेटली ने कहा, ‘मुख्य उद्देश्य यह है कि ज्यादा से ज्यादा जहां भी संभव हो, अर्थव्यवस्था में नकदी लेन-देन कम किया जाए। इसके विकल्प के रूप में डिजिटल लेन-देन को बढ़ाना है।’ उन्होंने कहा, ‘सरकार ने क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, ई-वॉलेट और बाकी सारे डिजिटल करेंसी वाले उपायों को लागू करने इंतजाम किया है। सरकार ने अपनी डिजीटल पॉलिसी के तहत ये निर्णय लिए हैं।’ हालांकि, वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया अपनी तय प्रक्रिया के तहत नए नोट जारी कर रहा है। वित्त मंत्री के अनुसार, जब से विमुद्रीकरण हुआ है, पेट्रोल और डीजल की खरीद के लिए 40 फीसद लेन-देन कैशलेस हो रहा है। पहले यह आंकड़ 20 फीसद था। इस आंकड़े को बढ़ाने के लिए 0.75 फीसद छूट देने की योजना बनाई गई है। श्री जेटली के अनुसार, देश भर में साढ़े चार करोड़ उपभोक्ता पेट्रोल-डीजल खरीदते हैं। रोजाना 1800 करोड़ रुपए की बिक्री होती है। एक महीने में डिजिटल पद्धति से खरीदने वाले लोगों की संख्या दोगुनी हो गई है। इससे अभी हर महीने 360 करोड़ रुपए रोजाना नकदी की जरूरत खत्म हुई है। 30 फीसद ग्राहक और बढ़े तो नकदी की सालाना जरूरत दो लाख करोड़ रुपए कम हो जाएगी।
नकदी रहित व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए एक लाख गांवों में प्वॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनें लगाई जाएंगी। श्री जेटली के अनुसार, 10 हजार तक की आबादी वाले एक लाख गांवों में सरकारी फंड से दो पीओएस मशीनें लगाई जाएंगी। एग्रीकल्चर क्रेडिट सोसाइटी और सहकारी संस्थाओं को इसके लिए चुना जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि अगर एक गांव की औसत आबादी 7,500 मानी जाए तो 75 करोड़ लोगों तक इसकी पहुंच होगी। नाबार्ड के जरिए क्षेत्रीय ग्रामीण और सहकारी बैंक चार करोड़ 32 लाख रुपे कार्ड जारी करेंगे, जो किसान क्रेडिट कार्ड धारक किसानों को दिया जाएगा। उपनगरीय रेलवे नेटवर्क में डिजिटल मोड से मासिक कार्ड बनवाने वाले लोगों को आधा फीसद का डिस्काउंट मिलेगा। इसकी शुरुआत मुंबई से की जाएगी। वित्त मंत्री के अनुसार, रेलवे में सफर करने वाले लोगों में 58 फीसद अपनी बुकिंग ऑनलाइन करते हैं। ऑनलाइन बुकिंग पर 10 लाख रुपए का दुर्घटना बीमा कवर मिलेगा। रेलवे कैटरिंग, रिटायरमेंट रूम जैसी सुविधाओं के लिए डिजिटल भुगतान करने पर पांच फीसद की छूट मिलेगी। सरकारी क्षेत्र की बीमा कंपनियों के पोर्टल से ऑनलाइन पॉलिसी लेने और प्रीमियम चुकाने वालों को 10 फीसद की छूट मिलेगी। जनरल इंश्योरेंस पर 10 फीसद और लाइफ इंश्योरेंस पर आठ फीसद की छूट मिलेगी। केंद्रीय विभाग और सरकारी कंपनियां सुनिश्चित करेंगी कि लेन-देन की फीस और एमटीआर भुगतान का बोझ लोगों पर न पड़े। सरकारी क्षेत्र के बैंक यह सुनिश्चित करेंगे कि माइक्रो, एटीएम, पीओएस टर्मिनल और मोबाइल पीओएस का किराया 100 रुपए से ज्यादा न हो। टोल नाकों पर डिजीटल लेन-देन में 10 फीसद की छूट मिलेगी।
मुख्यमंत्रियों की उपसमिति की पहली बैठक:
नकदी लेन-देन को कम करने और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के उपायों पर विचार कर रही मुख्यमंत्रियों की उप समिति ने रिजर्व बैंक के मुंबई स्थित मुख्यालय में दिनभर बैठक की। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता वाली उप समिति की बैठक में सभी बैंकों के शीर्ष अधिकारियों, रिजर्व बैंक के अधिकारियों और आर्थिक विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इसमें नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ कांत ने भी भाग लिया। इस बैठक में डेबिट काड, क्रेडिट कार्ड, डिजिटल वॉलेज, इंटरनेट बैंकिंग, यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस और बैंकिंग एप के माध्यम से लेन-देन को बढ़ावा देने के उपायों पर विचार किया गया। इस उपसमिति की एक बैठक पिछले हफ्ते वीडियो क्रांफ्रेंसिंग के जरिए की गई थी। नायडू की अध्यक्षता वाली इस उप समिति में ओडीशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, सिकिकम के सीएम पवन कुमार चामलिंग और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस शामिल हैं। इनके अलावा इसमें यूआइडीएआई के पूर्व अध्यक्ष नंदन नीलेकणि, बोस्टन कंसल्टेंसी ग्रुप के अध्यक्ष जनमेजय सिन्हा, नेटकोर के एमडी राजेश जैन, आइस्पिरिट के सह संस्थापक शरद शर्मा और आइआइएम, अमदाबाद के प्रोफेसर जयंत वर्मा विशेष आमंत्रित सदस्य हैं।
– वित्त मंत्री अरुण जेटली ने डिजिटल भुगतान पर विशेष छूट का ऐलान किया
– पेट्रोल-डीजल की खरीद, रेल टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग, ऑन लाइन बीमा खरीद पर विशेष छूट
– एक लाख गांवों में लगाई जाएंगी प्वॉइंट ऑफ सेल मशीनें
– चार करोड़ 32 लाख किसानों को जारी किए जाएंगे रुपे कार्ड

