केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए पेंशन से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। पेंशनधारकों की सुरक्षा को मजबूत करने और प्रक्रियाओं को सख्त करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने पेंशनर या फैमिली पेंशनर की मृत्यु के बाद पेंशन से जुड़े दस्तावेज़ों के निपटान को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं। इसके अलावा, पेंशन की वसूली और कटौती से जुड़े नियमों पर पहले जारी स्पष्टीकरण भी जारी रहेंगे। ये स्पष्टीकरण लाखों सेवानिवृत्त केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को बड़ा राहत देंगे।
ये सभी फैसले कन्फ्यूजन को कम करने, मनमानी कार्रवाई को रोकने और यह सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए हैं कि पेंशन भुगतान प्रक्रिया पारदर्शी और एक समान तरीके से हैंडल हो।
तेल नहीं, चीन असली वजह! रॉबर्ट कियोसाकी ने अमेरिका की जंग पर ये क्या कह दिया?
सरकार के नए आदेश में क्या कहा गया है?
वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग (Department of Expenditure) के अंतर्गत आने वाले केंद्रीय पेंशन लेखा कार्यालय (CPAO) ने पेंशनर या पारिवारिक पेंशनर की मृत्यु के बाद पेंशन भुगतान आदेश (PPO) लौटाने की सही प्रक्रिया को दोहराया है।
मौजूदा पेंशन योजना दिशानिर्देशों के अनुसार, जब किसी पेंशनर या फैमिली पेंशनर का निधन हो जाता है तो बैंक का केंद्रीकृत पेंशन प्रोसेसिंग केंद्र (CPPC) डिस्बर्सर के हिस्से वाले PPO को मृत्यु प्रमाण पत्र तथा CPAO द्वारा समय-समय पर जारी किए गए अन्य संबंधित पेंशन दस्तावेज़ों के साथ वापस भेजना जरूरी है। सबसे अहम बात यह है कि ये सभी दस्तावेज़ केवल CPAO के जरिए ही भेजे जाने चाहिए।
US टैरिफ की तलवार! रूसी तेल पर भारत को लेना होगा दो-टूक फैसला, GTRI ने जताई चिंता
आखिर क्यों पड़ी इस स्पष्टीकरण की जरूरत?
CPAO ने यह भी नोट किया है कि कुछ बैंक और केंद्रीकृत पेंशन प्रोसेसिंग केंद्र (CPPC) पेंशनर की मृत्यु के बाद PPO को सीधे संबंधित वेतन एवं लेखा कार्यालय (PAO) या विभागों को भेज रहे थे। निर्धारित प्रक्रिया के तहत ऐसा करने की अनुमति नहीं है।
लेटेस्ट ऑफिस मेमोरेंडम में साफ किया गया है कि इस तरह के नियमों का पालन नहीं किया गया तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा। और केंद्रीय सिविल पेंशन का प्रबंधन करने वाले सभी बैंकों को निर्धारित प्रक्रिया का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसका मकसद एकदम साफ है- CPAO के जरिए एक ही स्टैंडर्ड प्रक्रिया अपनाने से बेहतर निगरानी, जवाबदेही सुनिश्चित होगी और भविष्य में विवादों की संभावना कम होगी।
पेंशनधारकों और उनके परिवारों को मिलेगी मदद
हालांकि यह निर्देश मुख्य रूप से प्रक्रियात्मक है। लेकिन इसका सीधा असर दिवंगत पेंशनरों के परिवारों पर पड़ता है। PPO को सही तरीके से भेजे जाने से देरी, दस्तावेज़ों के गुम होने और अनावश्यक भ्रम से बचा जा सकता है- खासकर उस संवेदनशील समय में जब परिवार के सदस्य पहले से ही भावनात्मक और प्रशासनिक दबाव का सामना कर रहे होते हैं।
सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन में मनमानी कटौती नहीं
इसके साथ ही सरकार ने पेंशनरों को एक अन्य लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे पर भी मजबूत सुरक्षा दी है। यानी पेंशन के अंतिम रूप से स्वीकृत हो जाने के बाद उसमें कटौती या वसूली का मामला।
पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग (DoPPW) ने स्पष्ट किया है कि एक बार जब पेंशन या पारिवारिक पेंशन अंतिम रूप से मंजूर हो जाती है तो उसे कम नहीं किया जा सकता, जब तक कि कोई स्पष्ट लिपिकीय त्रुटि (जैसे गणना या लिखने में हुई गलती) सामने न आए।
सबसे अहम बात यह है कि यदि ऐसी गलती दो साल बाद सामने आती है, तो DoPPW की पूर्व अनुमति के बिना पेंशन में कटौती नहीं की जा सकती। इससे विभागों द्वारा सेवानिवृत्ति के कई साल बाद अचानक पेंशन घटाने पर प्रभावी रोक लग जाती है और उच्च स्तर की जांच सुनिश्चित होती है।
अगर गलती से अधिक पेंशन का भुगतान हो गया हो तो क्या होगा?
नए नियम उन परिस्थितियों को भी स्पष्ट करते हैं जहां सरकारी गलती के कारण ज्यादा पेंशन का भुगतान हो गया हो। यदि पेंशनर की इसमें कोई गलती नहीं है और उसने तथ्यों को गलत तरीके से पेश नहीं किया तो संबंधित मंत्रालय को व्यय विभाग (Department of Expenditure) से परामर्श कर यह तय करना होगा कि वसूली माफ की जाए या नहीं।
यदि इसके बावजूद वसूली का फैसला लिया जाता है तो पेंशनर को दो महीने का नोटिस देना अनिवार्य है।
