Operation Sindoor Impact on Budget 2026  : 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाला केंद्रीय बजट सिर्फ सरकार की आमदनी और खर्च का हिसाब नहीं होगा, बल्कि इसमें यह संकेत भी मिलेगा कि भारत आने वाले समय में अपनी सुरक्षा को कैसे मजबूत करना चाहता है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद देश में युद्ध और रक्षा रणनीति की अहमियत और प्राथमिकता और बढ़ी है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या इसका असर बजट 2026 में भी दिखेगा? क्या सरकार इस बार डिफेंस बजट में इजाफा करने पर विशेष ध्यान देगी?

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदली तस्वीर

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 भारतीयों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत ने सीमा पार ऑपरेशन सिंदूर के नाम से फौजी कार्रवाई की। यह कार्रवाई सिर्फ जवाबी हमला नहीं, बल्कि तकनीक पर आधारित जंग की नई मिसाल भी थी। इस ऑपरेशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार किए गए पुराने और नए डेटा का इस्तेमाल किया गया, जिससे टारगेटिंग में करीब 94 फीसदी सटीकता हासिल हुई। इससे साफ हो गया कि भविष्य की लड़ाई सिर्फ सैनिकों की संख्या से नहीं, बल्कि तकनीक और डेटा की ताकत से लड़ी जाएगी।

बजट 2026 क्यों है अहम

1 फरवरी को जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी, तो यह सिर्फ आर्थिक दस्तावेज नहीं होगा। यह संकेत देगा कि भारत अपनी अगली संभावित चुनौती के लिए किस तरह तैयारी कर रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद डिफेंस पॉलिसी में फर्क दिखने लगा है। पहले जहां पारंपरिक हथियारों पर जोर था, अब ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मिसाइल डिफेंस और सर्विलांस सिस्टम (surveillance systems) को ज्यादा अहम माना जा रहा है। ऐसे में बजट से यह उम्मीद की जा रही है कि वह इस नई रणनीति को मजबूत आधार देगा।

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अंतरराष्ट्रीय हालात का असर

अंतरराष्ट्रीय हालात भारत के लिए आसान नहीं हैं। चीन और पाकिस्तान के साथ बीते कुछ वर्षों में तनाव बढ़ा है। दूसरी ओर सरकार अपने घाटे को काबू में रखने की कोशिश भी कर रही है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को जीडीपी के करीब 4.3 फीसदी तक सीमित रखने का लक्ष्य तय किया है। हालांकि कुछ एजेंसियों का अनुमान है कि डिफेंस और कैपिटल एक्सपेंडीचर बढ़ने से यह 4.6 फीसदी तक जा सकता है। सरकार कोविड के समय बढ़े सरकारी कर्ज को सामान्य स्तर पर लाने के लिए डेट को धीरे-धीरे घटाने को प्राथमिकता देती रही है। लेकिन इसके साथ ही सरकार को बुनियादी ढांचे, उद्योग और रोजगार पर खर्च करना है और रक्षा तैयारियों को भी मजबूत करना है। कुल मिलाकर यह एक मुश्किल चुनौती है।

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रक्षा बजट बढ़ा लेकिन हिस्सेदारी नहीं

वित्त वर्ष 2025-26 में डिफेंस के लिए करीब 6.81 लाख करोड़ रुपये के बजट प्रावधान किया गया, जो पिछले साल से लगभग 9.5 फीसदी ज्यादा है। पहली नजर में यह बढ़ोतरी अच्छी लगती है। लेकिन केंद्र सरकार के कुल खर्च में रक्षा बजट का हिस्सा पिछले कुछ वर्षों से लगभग स्थिर बना हुआ है। इस बीच चीन और पाकिस्तान ने अपने सैन्य खर्च में काफी इजाफा किया है, इससे भारत पर भी अपनी तैयारियों में तेजी लाने का दबाव बढ़ता है।

आधुनिक हथियारों पर बढ़ता फोकस

डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने हाल में लगभग 79,000 करोड़ रुपये की आधुनिक परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें एयर डिफेंस मिसाइल, लंबी दूरी के रॉकेट, फाइटर ड्रोन, एंटी-ड्रोन सिस्टम, हवा में ईंधन भरने वाले एयरक्राफ्ट और आधुनिक सर्विलांस सिस्टम शामिल हैं। इससे संकेत मिलता है कि सरकार हथियारों की खरीद और तकनीकी अपग्रेडेशन को लेकर काफी गंभीर है।

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डिफेंस सेक्टर में कैपिटल एक्सपेंडीचर का हाल

डिफेंस सेक्टर में पूंजीगत खर्च यानी कैपिटल एक्सपेंडिचर की ग्रोथ भी चर्चा में है। वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 1.8 खरब रुपये का कैपिटल एक्सपेंडीचर तय किया गया था। अप्रैल से नवंबर के बीच ही इसका 62 फीसदी हिस्सा खर्च हो चुका है, जो पिछले कुछ वर्षों की तुलना में कहीं ज्यादा तेज रफ्तार दिखाता है। इससे पता चलता है कि सरकार मंजूरी के बाद पैसे खर्च करने में भी तेजी दिखा रही है। यह तेजी सिर्फ हालिया हालात की वजह से है या इसे आने वाले वर्षों में भी जारी रखा जाएगा, इसका जवाब आने वाले बजट में मिलने की उम्मीद है।

बजट 2026 में क्या है असली चुनौती

बजट 2026 में सरकार के सामने असली चुनौती यह तय करने की होगी कि रक्षा खर्च सिर्फ संकट के समय बढ़ाया जाए या फिर इसमें लगातार इजाफा जारी रखा जाएगा। ऑपरेशन सिंदूर ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में जंग के दौरान तकनीक, रिसर्च और स्वदेशी डिफेंस प्रोडक्ट्स की अहमियत बढ़ने वाली है। लिहाजा इस दिशा में बजट एलोकेशन मजबूती से आगे बढ़ाना जरूरी है।