Budget 2026 : Home Loan Tax Benefit : महंगे होते घर, भारी-भरकम होम लोन और बढ़ती ईएमआई। आज के होमबायर की यही सच्चाई है. ऐसे में 1 फरवरी 2026 को पेश होने जा रहे बजट से पहले लोगों के मन में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या सरकार इस पर होम लोन के इंटरेस्ट पेमेंट पर मिलने वाले टैक्स बेनिफिट को बढ़ाकर उन्हें कुछ राहत देगी? खास तौर पर ओल्ड टैक्स रिजीम चुनने वाले लाखों होम लोन ग्राहकों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या इस बार होम लोन इंटरेस्ट पर मिलने वाली छूट की सीमा 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये की जाएगी।
ओल्ड टैक्स रिजीम होमबायर्स में अब भी पॉपुलर
होम लोन लेने वाले बहुत से टैक्सपेयर अब भी ओल्ड टैक्स रिजीम को ज्यादा फायदेमंद मान रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इसमें होम लोन पर कई तरह की टैक्स छूट मिलती है। होम लोन के प्रिंसिपल रिपेमेंट पर सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख रुपये तक की छूट मिलती है। वहीं, होम लोन इंटरेस्ट पेमेंट पर सेक्शन 24(b) के तहत सालाना 2 लाख रुपये तक के डिडक्शन का प्रावधान है। हालांकि बरसों पुरानी इस लिमिट में घरों की बढ़ती कीमतों को ध्यान में रखते हुए इजाफा करने की मांग लंबे अरसे से उठती रही है।
इसके अलावा पहली बार घर खरीदने वालों को सेक्शन 80EE और 80EEA के तहत अतिरिक्त इंटरेस्ट बेनिफिट भी मिल सकता है, बशर्ते कुछ शर्तें पूरी हों। अगर घर जॉइंट नाम पर है, तो पति-पत्नी दोनों अलग-अलग ये टैक्स बेनिफिट क्लेम कर सकते हैं, जिससे कुल बचत और बढ़ जाती है।
नई टैक्स रिजीम में नहीं मिलता फायदा
नई टैक्स रिजीम को सरल जरूर बनाया गया है, लेकिन होम लोन लेने वालों के लिए इसमें टैक्स बचाने के मौके बेहद सीमित हैं। इस रिजीम में 80C, 80EE और 80EEA जैसी छूट नहीं मिलती। सेक्शन 24(b) के तहत भी इंटरेस्ट डिडक्शन सिर्फ किराये पर दिए गए घर के लिए ही मिलता है और वह भी सिर्फ रेंटल इनकम की लिमिट तक। सैलरी इनकम से उसे सेट-ऑफ नहीं किया जा सकता।
यही वजह है कि जिन लोगों ने होम लोन लिया है या लेने की योजना बना रहे हैं, वे आज भी ओल्ड टैक्स रिजीम को ज्यादा बेहतर विकल्प मानते हैं।
अफोर्डेबल हाउसिंग पर बढ़ा दबाव
रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म नाइट फ्रैंक की कुछ दिनों पहले आई रिपोर्ट में कहा गया है कि अफोर्डेबल हाउसिंग सेगमेंट लगातार कमजोर होता जा रहा है। 2018 में जहां 50 लाख रुपये तक कीमत वाले घरों की हिस्सेदारी कुल बिक्री में 54 प्रतिशत थी, वहीं 2025 में यह घटकर सिर्फ 21 प्रतिशत रह गई है।
हालांकि कुल हाउसिंग सेल्स में बड़ी गिरावट नहीं आई, लेकिन अफोर्डेबल हाउसिंग की बिक्री में सालाना आधार पर करीब 17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसकी वजह बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतें, आम लोगों की घटती डिस्पोजेबल इनकम और लोन तक सीमित पहुंच मानी जा रही है। EMI और ब्याज दरों के दबाव को इसी सेगमेंट के खरीदार सबसे ज्यादा महसूस करते हैं।
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क्यों जरूरी है होम लोन इंटरेस्ट पर छूट बढ़ाना
होम लोन के इंटरेस्ट पेमेंट पर मिलने वाली सालाना 2 लाख रुपये की छूट अब घरों की ऊंची कीमतों और कर्ज की बढ़ती रकम के कारण काफी कम लगती है। बड़े शहरों में घरों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जिससे लोन अमाउंट भी बढ़ा है। नतीजतन, सालाना इंटरेस्ट पेमेंट 2 लाख रुपये से कहीं ज्यादा हो चुका है।
इसी को देखते हुए नाइट फ्रैंक ने सरकार को सुझाव दिया है कि सेक्शन 24(b) के तहत होम लोन इंटरेस्ट की अधिकतम सीमा 5 लाख रुपये की जाए। इससे मिडिल क्लास और अफोर्डेबल सेगमेंट के खरीदारों को सीधी राहत मिलेगी और घर खरीदना थोड़ा आसान होगा। साथ ही हाउसिंग सेक्टर को भी सपोर्ट मिलेगा।
PMAY 2.0 की लिमिट भी बनी चुनौती
प्रधानमंत्री आवास योजना यानी PMAY 2.0 के तहत मिलने वाले फायदे भी बड़े शहरों के लिए नाकाफी साबित हो रहे हैं। इस स्कीम का फायदा तभी मिलता है, जब घर की कीमत 35 लाख रुपये के दायरे में हो, जबकि मेट्रो और बड़े शहरों में इस कीमत में घर मिलना लगभग असंभव हो गया है।
नाइट फ्रैंक का मानना है कि बड़े शहरों में इस सीमा को बढ़ाकर 75 लाख रुपये तक किया जाना चाहिए, ताकि असली एंड-यूजर्स को इसका फायदा मिल सके और स्कीम का उद्देश्य पूरा हो।
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बजट 2026 से क्यों बढ़ी उम्मीदें
बजट 2026 ऐसे समय में आ रहा है, जब हाउसिंग की डिमांड सिर्फ पहले घर तक सीमित नहीं रही। टियर-2 और टियर-3 शहरों में सेकंड होम और लाइफस्टाइल प्रॉपर्टी की मांग बढ़ रही है। वर्क फ्रॉम होम और हाइब्रिड वर्क कल्चर ने इस ट्रेंड को और मजबूत किया है।
लेकिन बढ़ती कीमतों और EMI के चलते अफोर्डेबिलिटी पर दबाव साफ दिख रहा है। ऐसे में अगर सरकार होम लोन इंटरेस्ट पेमेंट पर मिलने वाली छूट का दायरा 5 लाख रुपये तक बढ़ाती है, तो इससे लाखों परिवारों को बड़ी राहत मिल सकती है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि बजट 2026 में सरकार इस उम्मीद को हकीकत में बदलती है या नहीं।
