ऑनलाइन शॉपिंग और पेमेंट के दौरान विभिन्न कंपनियां इन दिनों अच्छा-खासा डिस्काउंट देती हैं। लोग भी कैशबैक के रूप में रियायत पाकर खुश हो जाते हैं। पर अगर आप भी मोबाइल ऐप्स पर कैशबैक का अधिक फायदा उठाने वालों में से हैं तो थोड़ा सतर्क हो जाइए। एक सीमा से अधिक कैशबैक पाने के बाद आपके पास आयकर (आईटी) का नोटिस आ सकता है।

जानकार की मानें तो लोगों को एक वित्त वर्ष में हासिल होने वाले कैशबैक्स का लेखा-जोखा रखना चाहिए। दरअसल, एक वित्त वर्ष में कुल कैशबैक की रकम अगर 50 हजार रुपए से पार जाएगी, उस स्थिति में आईटी का नोटिस भेजा जाएगा।

हालांकि, इंस्टैंट (तुरंत) डिस्काउंट के मामले में इस तरह की कोई दिक्कत नहीं होती। पर किसी सामान या सेवा की खरीद के दौरान मिलने वाले कैशबैक को आयकर अधिनियम के सेक्शन 56 के तहत आय के रूप में देखा जाता है। सेक्शन 56 के मुताबिक, “अगर यह रकम (कैशबैक की) एक वित्त वर्ष में 50 हजार से ऊपर निकल जाती, तब पूरी रकम पर टैक्स देना पड़ता है।”

एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति बिना पेमेंट के या तोहफे के रूप में किसी बाहरी शख्स (दोस्त वगैरह) से शादी या अन्य किसी समारोह पर सामान-चीज लेता है, तब उसकी रकम को भी कैशबैक की कुल राशि में जोड़ दिया जाता है। यह रकम अन्य स्रोतों से आने वाली आय मानी जाती है। बता दें कि इस प्रकार के तोहफों या सामान-चीज को आयकर विभाग अधिनियम के सेक्शन 56 (2) (7) के छूट प्राप्त नहीं है।

ऐसे में जब भी आप विभिन्न क्रेडिट कार्ड्स से, पेमेंट ऐप्स- पेटीएम, गूगल पे, तेज, फोन पे से या फ्लिपकार्ट और अमेजन पर कैश बैक पाएं तो उसे कहीं लिख लें। भविष्य में इन कैशबैक की रकम का जिक्र आप इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करते वक्त ‘इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज’ (अन्य स्रोतों से आय) कॉलम में कर सकेंगे। ऐसे में इस चीज की जानकारी आईटी के पास भी रहेगी। मसल टैक्स स्लैब के तहत आने पर शख्स को और विभाग को इस बाबत जानकारी होगी, जिससे उसे कोई अतिरिक्त नोटिस नहीं भेजा जाएगा।