नोटबंदी के बाद देश में ऐसी 73,000 कंपनियों के बैंक खातों में 24,000 करोड़ रुपये की रकम जमा कराई जिनका पंजीकरण अब रद्द किया जा चुका है। सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। काले धन और अवैध संपत्तियों पर शिकंजा कसने के लिए कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने करीब 2.26 लाख कंपनियों का पंजीकरण रद्द कर दिया है। ये कंपनियां लंबे समय से कारोबार नहीं कर रही थी। इनमें से कई कंपनियों का इस्तेमाल धन की हेराफेरी के लिए किए जाने का संदेह है।
मंत्रालय द्वारा संकलित आंकड़ों के मुताबिक, 2.26 लाख कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया गया था, जिनमें से 1.68 कंपनियों के बैंक खातों से पता चलता है कि नोटबंदी के बाद उनके खातों में रकम जमा कराई गई थी। मंत्रालय ने बयान में कहा, “इनमें से 73,000 कंपनियों के खातों में 24,000 करोड़ रुपये जमा हुए थे।
विभिन्न बैंकों से कंपनियों की जानकारी जुटाने की प्रक्रिया चल रही है।” दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि 68 कंपनियों के खिलाफ जांच चल रही है। इनमें 19 कंपनियों की जांच गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) जबकि 49 कंपनियों की जांच रजिस्ट्रार आॅफ कंपनीज कर रहा है।
एक सप्ताह पहने की मोदी के नोटबंदी के समर्थन में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार को कहा कि बैंकों की भूमिका के कारण नोटबंदी का लाभ जितना लोगों को मिलना चाहिए था, उतना नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति में बैंकों की बड़ी भूमिका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बैंकों को सिर्फ जमा, निकासी एवं ऋण प्रदान करना ही कार्य नहीं है, बल्कि एक-एक योजना में बैंकों की भूमिका बढ़ गई है।

