औरंगजेब की निशानी मिटाने निकली जनता कुछ देर के लिए भूल सकती है कि थोक महंगाई दर पिछले साल के…
औरंगजेब की निशानी मिटाने निकली जनता कुछ देर के लिए भूल सकती है कि थोक महंगाई दर पिछले साल के…
भारतीय राजनीति में न तो गरीबी नई है और न बेरोजगारी। नई है वह ‘रेवड़ी’ जो ‘राझां राझां कर दी…
चिराग पासवान बिहार के वह चेहरा हैं जिन्हें राजनीतिक वंश में जन्म लेने के बाद भी अपनी जमीन खुद तैयार…
याद करें, मनमोहन सिंह ने अमेरिका से परमाणु करार के लिए अपनी गठबंधन की सरकार तक को संकट में डाल…
वक्फ संशोधन विधेयक-2024 ने एक बार फिर पक्ष और विपक्ष को आमने-सामने खड़ा कर दिया। विपक्ष का आरोप है कि…
अमेरिका में नौकरियों में छंटनियों का दौर शुरू हो चुका है। दुनिया भर में अनुसंधान व अन्य सेवाओं को लेकर…
एक पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा था कि राजनीति में दो पक्षों में जब एक बहुत बुरा और दूसरा कम बुरा…
33 साल की नौकरी में 57 तबादले। व्यवस्था में ईमानदारी दुर्लभ है या ईमानदारों की मांग, यह प्रश्न यक्ष प्रश्न…
राहुल गांधी रोजगार की भाषा पर मेहनत करते रहें और जनता से संवाद करें। राहुल के सवालों का जवाब देने…
भारत की दलगत संसदीय राजनीति में निर्दलीय नेताओं की अपनी भूमिका है। ये अपना जनाधार अपने निजी काम और छवि…
Stampede in Maha Kumbh: जिन मीडियाकर्मियों की जिम्मेदारी थी व्यवस्थागत कमजोरी सामने लाने की, वे इस बात से खुश थे…
सरकारों ने श्रमिक क्षेत्र की आमदनी बढ़ाने को सत्ता का काम मानना ही छोड़ दिया है। वह जनता को कह…