drug addicted youth
संपादकीय: नशे के आदी युवाओं में सुधार की गुंजाइश, उपेक्षा के बजाय उसके प्रति करना चाहिए उचित व्यवहार

जब कोई युवा संगति या अन्य वजहों से धूम्रपान, शराब या इससे ज्यादा घातक नशीले पदार्थों का सेवन करने लगता…

जनसत्ता- दुनिया मेरे आगे
दुनिया मेरे आगे: मौन संघर्ष की चमक होती है जोरदार, सही दिशा में किए गए प्रयास से ही मिलती है सफलता

जिस तरह चमक के बिना सितारे, महक के बिना फूल, पानी के बिना नदियां, तार के बिना सितार, उसी प्रकार…

health System
Blog: देश में तेजी से बढ़ रही बुजुर्गों की संख्या, हेल्थ सिस्टम का हाल बेहाल

निस्संदेह चिकित्सा के क्षेत्र में हमने क्रांति की बातें की हैं, लेकिन उसमें अपनी साख बनाने के अपेक्षित प्रयास नहीं…

Delhi Police
संपादकीय: दिल्ली में स्कूलों को लगातार मिल रही धमकियां, एक हफ्ते में तीन बार हुई घटना, बड़े खतरे के संकेत

पिछले कुछ समय से इस तरह के धमकी भरे ईमेल भेजने का सिलसिला-सा बन गया है। मगर बीते एक हफ्ते…

foreign exchange reserves
संपादकीय: मुद्रा भंडार में लगातार आ रही कमी, लोगों के साथ सरकार के लिए खतरे की घंटी

प्रति व्यक्ति आय नहीं बढ़ पा रही, दुनिया के कई देशों में संघर्ष के चलते आपूर्ति शृंखला गड़बड़ हो गई…

Rakesh Sinha ka Blog, Ravivari Stambh
Blog: भारतीय संविधान पर विवाद क्यों? सामाजिक न्याय का आधार या राजनीतिक नैरेटिव?

संविधान को कोई पवित्र ग्रंथ मानना इसके साथ ही अन्याय है। यह शुद्ध रूप से हमारी राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक व्यवस्था…

Tavleen Singh Sunday Column
तवलीन सिंह का कॉलम वक्त की नब्ज: संसद या तमाशा मंच? जनता के पैसे और भरोसे का क्या होगा?

संसद का समय बर्बाद करने के बदले अच्छा होता अगर सदन के अंदर बहस सुनने को मिलती उन किसानों की…

Ravivari Stambh, P. Chidambaram Column Dusri Nazar
पी. चिदंबरम का कॉलम दूसरी नजर: 1991 से 2024 तक- भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रगति और चुनौतियां

अगर हम आंकड़ों पर गौर करें, तो भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर पिछले छह वर्षों में औसतन 4.99 फीसद…

Jansatta Editorial, jansatta Epaper
संपादकीय: सुप्रीम कोर्ट का पूजा स्थलों पर दावों की सुनवाई पर रोक सामाजिक शांति के लिए महत्वपूर्ण कदम

सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में क्या फैसला करता है, देखने की बात है, मगर हमारे संविधान की मूल भावना क्या…

जनसत्ता संपादकीय, Jansatta Editorial
संपादकीय: शतरंज में 18 साल की उम्र के गुकेश का विश्व चैंपियन बनना और डिंग लिरेन को हराकर इतिहास रचना

गुकेश ने शतरंज की विश्व प्रतियोगिता में यह उपलब्धि सिर्फ अठारह वर्ष की उम्र में हासिल की है और यही…

जनसत्ता ब्लॉग, Jansatta Blog
Blog: अंतरिक्ष में बढ़ता कचरा, उपग्रहों से लेकर मानव सभ्यता के लिए गंभीर खतरे का अलार्म

अंतरिक्ष की ऊपरी कक्षाओं में भारत समेत दुनिया के कई देशों के 3135 संचार उपग्रह पहले से ही हैं। अभी…

Jansatta Dunia Mere Aage, jansatta Epaper
दुनिया मेरे आगे: परिहास का परिदृश्य, जीवन को खुशहाल बनाने की कला और हंसने का सलीका

हास्य निश्चित रूप से खुशहाल जीवन का एक जरूरी हिस्सा है, मगर इसकी भी प्रासंगिकता होनी चाहिए। तभी इसका महत्त्व…

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