गिद्ध !!
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नीरज द्विवेदी
आसमान से गिद्ध गायब हो रहे हैं,
अख़बार कहता है-
कोई ‘डाइक्लोफेनैक’ का असर है शायद?
अख़बार, अक्सर पूरा सच नहीं बताते !
आसमान से गिद्ध तो गायब हुये
पर ज़मीन पर उतर आये – हम इंसानों के बीच..
गिद्ध अब हर जगह पे हैं,
गिद्ध अब हर तरह के हैं..
गावों के गिद्ध,
शहरों के गिद्ध,
घरों के गिद्ध,
चौराहों के गिद्ध,
हिंदू मुसलमां
हरा केसरिया
कुछ मजहबी गिद्ध हैं
कुछ हैं — सेकुलर गिद्ध…
खुदा के घर से लेकर, संसद के दर तक..
हर तरफ गिद्धों का ही बसेरा है
गिद्धों का हूजूम है, गिद्धों का ही डेरा है ।
प्रकृति का नियम है..
संतुलन हमेशा बना रहता है !
इसीलिये कहता हूँ,
झूठ लिखता है अख़बार…
आसमान से गिद्ध गायब नही हुये हैं,
बस, ज़मीन पर उतर आये हैं ।।।
