धमकी, जेहाद के नारों से, हथियारों से

कश्मीर कभी हथिया लोगे, यह मत समझो।

हमलों से, अत्याचारों से, संहारों से

भारत का शीश झुका लोगे, यह मत समझो।

जब तक गंगा की धार, सिंधु में ज्वार

अग्नि में जलन, सूर्य में तपन शेष।

स्वातंत्र्य समर की वेदी पर अर्पित होंगे

अगणित जीवन, यौवन अशेष।।

अमेरिका क्या संसार भले ही हो विरुद्ध

काश्मीर पर भारत का ध्वज नहीं झुकेगा,

एक नहीं, दो नहीं, करो बीसों समझौते

पर स्वतंत्र भारत का मस्तक नहीं झुकेगा.