Siyasi Kissa: देवीलाल और अरुण नेहरू की चाल और वी.पी.सिंह बन गए PM, देखते रहे गए थे चंद्रशेखर

बात अस्सी के दशक के आखिरी सालों की है…बोफोर्स तोप घोटाले के मुद्दे ने भारतीय राजनीति में भूचाल ला दिया था। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता विश्वनाथ प्रताप सिंह ने तत्कालिन प्रधानमंत्री राजीव गांधी पर कमिशनखोरी को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस छोड़ा और संयुक्त विपक्ष के साथ मिलकर 1989 के लोकसभा चुनावों में ताल ठोंकी…चुनाव नतीजे आए तो कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी जरूर थी, मगर बहुत के आंकड़े से

काफी दूर…ऐसे में तय था कि 144 सीटें जीतने वाली दूसरी सबसे बड़ी पार्टी जनता दल ही सरकार बनाएगी…क्योंकि उसे बीजेपी और लेफ्ट का समर्थन भी हासिल था…मगर सवाल ये था कि उस सरकार का मुखिया कौन होगा..

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