राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ से जुड़े एक दलित संगठन ने विधानसभा चुनाव के तहत गुजरात में एक कार्यक्रम का आयोजन करने जा रही है। इस मामले पर भारतीय बौद्ध संघ के अध्यक्ष भांते संघप्रिय राहुल ने बताया कि इस कार्यक्रम का मकसद है कि समुदायों के बीच की दूरियां खत्म हों और यह सोच भी खत्म हो जाए कि बीजेपी और आरएसएस दलितों के खिलाफ है। अभियान को चलाने वाले राहुल
ने कहा कि देश में ऐसे कई लोग हैं जिन्हें बीजेपी की नीतियां नहीं पसंद और आरएसएस व बीजेपी की छवि खराब करने के लिए दलित-विरोधी होने का आरोप लगाते हैं। ऊना जैसी घटनाओं से भी काफी नुकसान पहुंचा है। आरएसएस और बीजेपी से बड़ा दलिता का समर्थक और कोई नहीं है।” राहुल ने बताया कि यह रथ यात्रा अक्टूबर माह में सोमनाथ में समाप्त होगी। इसके समापन पर पीएम नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे भी मौजूद होंगे। राहुल ने कहा कि इस दौरान समुदाय के ऐसे लोगों से भी मिला जाएगा, जिन्हें छुआछूत समझा जाता है। उन्होंने कहा कि इसके तहत कुछ गांवों की सूचि तैयार की है जहां दलित और ऊंची जात वालों के बीच दरार साफ दिखाई देती है। गांधीनगर जिले में चौधरी वासना नाम का ऐसा ही गांव है। हम अपर कास्ट के नेताओं को रथ यात्रा में शामिल होने का न्यौता देंगे, ताकि लोगों के बीच भेदभाव खत्म होने में मदद मिले। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य दलितों को ईसाइयों और मुस्लिमों के झांसे में आने से बचाना है। उन्होंने कहा कि बुद्ध और हिन्दू दो ऐसे धर्म हैं जिनका जन्म भारत में हुआ और दलित इनमें से किसी भी एक का पालन कर सकते हैं।
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