संसद का शीत सत्र खत्म होने से तीन दिन पहले राज्यसभा में बुधवार को डिसेबिलिटी बिल 2014 ज़रूरी बदलावों के साथ पास हो गया। इस बिल के पास होने का फायदा देश के 7-10 करोड़ दिव्यांगों को होगा। इस बिल के मुताबिक दिव्यांगों के साथ भेदभाव करने वालों को 6 महीने से 2 साल तक जेल की सज़ा और 10 हज़ार रुपए से 5 लाख रुपए तक का जुर्माना लगेगा।
डिसेबिलिटी बिल 2014 को पास करने में सत्ता पक्ष और विपक्ष एक साथ दिखे, वहीं जब से 16 नवंबर से शीत सत्र हुआ है तब से संसद में हंगामा हो रहा है और संसद की कार्रवाई में विघ्न पड़ रहा है। ये नया बिल पुराने डिसेबिलिटी बिल 1995 की जगह लेगा और यह उम्मीद जताई जा रही है कि दिव्यांग लोगों के मौलिक अधिकारों की रक्षा में यह विधेयक अहम भूमिका निभाएगा। नए बिल में नई डिसेबिलिटीज़ को शामिल कर इनकी संख्या को 7 से बढ़ाकर 21 कर दिया गया है। इन बिमारियों में सेरेब्रल पल्सी, मल्टीपल सिरोयसिस और ऑटिज़्म शामिल हैं। पुराने बिल के मुकाबले संशोधित बिल में 40 प्रतिशत से ज़्यादा डिसेबल लोगों को नौकरी, शिक्षा और सरकार स्कीमों में रिज़र्वेशन मिलेगा। प्राइवेट कंपनियों की इमारतों में डिसेबल लोगों के आने जाने के लिए सुविधाएं उपलब्ध करवानी होगी।
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