रोहित वेमूला की आत्महत्या की जांच के लिए गठित आयोग ने कहा- “रोहित अपनी आत्महत्या के लिए खुद ज़िम्मेदार, मां ने आरक्षण का लाभ लेने के लिए खुद को दलित बताया

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा बनाए गए एक सदस्यीय न्यायिक आयोग की जांच रिपोर्ट के मुताबिक हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के रिसर्च स्कॉलर रोहित वेमूला अपनी आत्महत्या के लिए खुद ज़िम्मेदार थे। इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एके रूपनवाल ने इस मामले में अपनी रिपोर्ट अगस्त में जमा करवा दी थी। 41 पन्नों की रिपोर्ट में कहा गया कि रोहित वेमूला ने निजी हताशा के कारण आत्महत्या की थी, न

कि भेदभाव किए जाने के चलते। रूपनवाल की रिपोर्ट के मुताबिक रोहित की मां राधिका ने आरक्षण का लाभ लेने के लिए खुद को दलित बताया। अपनी रिपोर्ट में उन्होंने 12 पन्नों के अपने निष्कर्ष में चार पन्नों में रोहित की जाति के बारे में जानकारी दी है। रिपोर्ट में कहा गया कि पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी और केंद्रीय मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने सिर्फ अपना दायित्व निभाया और यूनिवर्सिटी प्रशासन पर कोई दबाव नहीं डाला गया था। इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए रूपनवाल ने 50 से अधिक लोगों से बात की जिनमें से ज़्यादातर यूनिवर्सिटी के टीचर, अधिकारी और अन्य कर्मचारी थे। रोहित वेमूला ने 17 जनवरी को आत्महत्या की थी और 28 सितंबर को मानव संसाधन मंत्रालय ने मामले की जांच के लिए एक सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया था। हमारे सहयोगी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने रूपनवाल से उनकी रिपोर्ट के बारे में बात करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने इस पर कोई भी टिप्पणी करने से मना कर दिया।

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