ट्रिपल तलाक मामले पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने 27 मार्च को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि अगर तीन तलाक को अवैध करार कर दिया जाता है तो यह अल्लाह के निर्देशों की अनदेखी और पवित्र कुरान को फिर से लिखने जैसा होगा। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने संविधान के आर्टिकल 25 का हवाला देते हुए कहा कि इसमें व्यक्तिगत कानून प्रावधानों को पवित्र माना गया है।
उन्होंने कहा कि अगर पवित्र पुस्तक के छंदों की ऐसे निंदा होती रही, तो जल्द ही इस्लाम खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि हालांकि तीन तलाक इस्लाम में तलाक का एक असामान्य तरीका है, लेकिन इसे अवैध करार नहीं दिया जा सकता, क्योंकि यह कुरान में लिखा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक कुरान में तीन तलाक को अनिवार्य बताते हुए बोर्ड ने इस मामले की सुनवाई से तीन दिन पहले अपने लिखित जवाब में कहा कि पवित्र किताब के मुताबिक तीन बार तलाक कहने के बाद पत्नी अपने पूर्व पति के लिए गैरकानूनी हो जाती है, जब तक कि ‘हलाला’ की प्रक्रिया अपने प्राकृतिक स्वरूप में न हो। बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि कोर्ट को व्यक्तिगत कानून प्रावधानों की वैधता की जांच करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने ये भी कहा कि सभी मुसलमान पैगम्बर के आदेशों को मानने के लिए बाध्य हैं और जो भी पैगम्बर मानने से मना करता है तो वह उनपर भी लागू है।
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