Ground Report: क्या “कन्वीनियंस इकोनॉमी” सच में सुविधा है, या शोषण का नया रूप?

10-मिनट डिलीवरी का वादा ग्राहकों को सुविधा देता है, लेकिन इसके पीछे गिग वर्कर्स की लंबी, थकाऊ घंटियां, शारीरिक-मानसिक तनाव, अनिश्चित कमाई और सामाजिक बहिष्कार छिपा है। यह भारत की 'कन्वीनियंस इकोनॉमी' की कड़वी सच्चाई है — जहाँ ग्राहकों की सुविधा का खामियाजा डिलीवरी वर्कर्स भुगतते हैं, बिना न्यूनतम मजदूरी, सुरक्षा या सम्मान के।

Zomato-Blinkit-Swiggy: दिल्ली की सड़कों पर ट्रैफिक भरी भीड़ में, The Indian Express के पत्रकार सौम्यरेंद्र बारीक ने तीन दिनों तक Zomato, Blinkit और Swiggy के लिए डिलीवरी वर्कर बनकर काम किया। उन्होंने कुल 23 डिलीवरी पूरी कीं और महज 782 रुपये कमाए — यानी घंटे के हिसाब से सिर्फ 34 रुपये! ईंधन खर्च काटने के बाद नेट कमाई और भी कम हो गई।