2002 नरोदा गाम देंगे केस में एक पूर्व अधिकारी ने बड़ा खुलासा किया है। कोर्ट में केस के सुनवाई के दौरान कार्यकारी मजिस्ट्रेट एम एल नाल्वया ने बताया कि गोधरा कांड में जलाकर मार दिए गए कारसेवकों के शव विश्व हिंदू परिषद के नेताओं को देने के लिए उसके वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा था। वहीं उन्होंने आगे बताया कि अपने अपने वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा आदेश मिलने के बाद, कारसेवकों के
शवों को विश्व हिंदू परिषद के नेता जयदीप पटेल को सौंपने के लिए एक पत्र तैयार किया था। उन्होंने आगे बताया कि घटना स्थल पर पहुंच कर उन्होंने उस समय कारसेवकों के शवों का नीरीक्षण किया। उन्होंने एक पत्र भी लिखा जिसमें शवों को अहमदाबाद के सोला सिविल अस्पताल से जयदीप पटेल को सौंपने के बारे में लिखा गया था। एसआईटी को नाल्वया ने बताया था कि पत्र उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों से आदेश मिलने के बाद लिखा। उन्होंने आगे कहा, “पत्र पर जयदीप द्वारा साइन नहीं किए गए थे और वो किसी और को सौंपा जा चुका था।” उन्होंने यह दावा भी किया कि वह जयदीप पटेल को पहले से नहीं जानते थे और न ही उनसे कभी मिले थे। जबकि एसआईटी के रिपोर्ट के मुताबिक पत्र पर किसी के भी हस्ताक्षर नहीं थे जिससे यह पता चल सकता था कि शवों को किसी ने बरामद किया था। गोधरा कांड में मारे गए लोगों के शवों को गोधरा से अहमदाबाद लाया गया जहां एक सभा कर उन्हें उनके परिजनों को सौंपा गया था। बता दें साबरमती एक्सप्रेस में कारसेवकों को जलाकर मार देने के बाद राज्य में कई जगह पर साम्प्रदायिक दंगे हुए थे। 2002 में ही नरोदा गाम दंगे भी हुए थे जिसमें 11 लोगों की जान चली गई थी। इस केस में लगभग 82 लोगों पर मुकदमा चल रहा है।
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