क्टर ऋषि कपूर उन लोगों में शामिल हैं जो कि अपने बात को लोगों के सामने रखने में हिचकिचाते नहीं हैं और ये उन्होंने एक बार फिर अपनी बायोग्राफी ‘खुल्लम खुल्ला’ की लॉन्च के मौके साबित कर दिया। ऋषि कपूर ने अपनी बायोग्राफी में अपना दिल निकाल कर रख दिया और उन्होंने ये बात भी कबूल की कि उन्होंने 1973 में फिल्म बॉबी के लिए बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड खरीदा
था और बहुत लंबे समय से उन्हें इस बात का अफसोस है। आपने अवॉर्ड खरीदने के लिए 30 हजार रुपए दिए थे? मैनें एक अवॉर्ड के लिए पैसे दिए थे। मैं इसके बारे में सच बोल रहा हूं। मैनें आपको बताया है कि मैं 21 साल का था जब मैं एक बड़ा स्टार बन गया था। मैं बहुत ही नादान और बिगड़ा हुआ था। मुझे फिल्मों के लिए बहुत पैसे मिल रहे थे। 1973 में पैसों का बहुत महत्व होता था। एक शख्स मेरे ऑफिस में आया और कहा कि अगर आप 30 हज़ार रुपए देंगे तो आपको अवॉर्ड दिया जाएगा। मैनें ऐसा किया, लेकिन मुझे ऐसा करने पर अफसोस है। मुझे नहीं पता कि वो पैसा अवॉर्ड वालों के पास गया या नहीं लेकिन क्योंकि मैनें पैसे दिए थे इसलिए मुझे लगता है कि मैनें वो अवॉर्ड पैसे देकर खरीदा। शायद मैनें वो अवॉर्ड जीता होगा लेकिन मुझे इस बात का अफसोस है ये सोचकर कि मैनें ये अवॉर्ड खरीदा था। ऋषि कपूर की बायोग्राफी का टाइटल उनकी ‘खेल खेल के’ फिल्म के फेमस ट्रैक से लिया गया है और इस बुक को मीना नायर ने भी लिखा है।
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