‘मेरी आवाज़ ही पहचान है, गर याद रहे’, जी हां सुरों की मल्लिका लता मंगेशकर जिनकी आवाज़ ही उनकी पहचान है, जिनका गाना सुनकर देश के पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की आंखों में आंसू आ गए थे, आज उसी भारत रत्न स्वर-कोकिला का 87वां जन्मदिन है। 28 सितंबर, 1929 में मध्य प्रदेश के इंदौैर में जन्मीं लता मंगेशकर को संगीत विरासत में मिला था। पिता दीनानाथ मंगेशकर की
मौत के बाद घर की सारी ज़िम्मेदारी 13 साल की लता के नाज़ुक कंधों पर आ गई। लता को पहली बार मंच पर गाने के लिए 25 रुपए मिले थे, जिसे वह अपनी पहली कमाई मानती हैं। वैसे फिल्मों में लता मंगेशकर का सफर आसान नहीं था, आपको ये जानकर हैरानी होगी कि लता मंगेशकर को कई म्यूज़िक डायरेक्टर्स ने ये कहकर रिजेक्ट कर दिया कि वो कभी गायिका नहीं बन सकती। लता की प्रतिभा को पहचान 1947 में आई फिल्म ‘आपकी सेवा’ से मिली। उस दौर में लता ने सभी बड़े संगीतकारों के साथ काम किया। लता ने 1948 से 1989 तक 30 हज़ार से ज़्यादा गाने गाए, जो कि एक रिकॉर्ड है। उनकी गायकी के लिए उन्हें पद्मभूषण, पद्मविभूषण, दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड, भारत रत्न जैसे कई अवॉर्ड्स से सम्मानित किया गया। कहा जाता है कि उनकी छोटी बहन आशा भोंसले द्वारा अपने से दोगुने उम्र के आदमी से शादी करने से बाद लता उनसे इतनी नाराज़ हुई कि दोनों ने कई साल एक-दूसरे से बात नहीं की। पूरे परिवार की ज़िम्मेदारी उनपर होने के कारण लता मंगेशकर ने कभी शादी नहीं की। इस बार अपने 87वें जन्मदिन पर लता जी ने अपना जन्मदिन मनाने से इंकार किया है। उन्होंने अपने प्रशंसकों से खास गुज़ारिश की है कि सीमा पर रखवाली कर रहे सेना के बहादुर जवानों को याद करें और उनके लिए दान करें।
… और पढ़ें